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Una News: 172 गांवों की जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं, खाद के लिए कैसे होगा पंजीकरण
Tue, 13 Oct 2026 12:58 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 13 Oct 2026 12:58 AM IST
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ऊना। खेतों में आलू की गुड़ाई चल रही है और फसल के लिए यूरिया खाद की जरूरत है लेकिन किसान खाद की व्यवस्था करने के बजाय ऑनलाइन पंजीकरण और बुकिंग की प्रक्रिया में उलझे हैं। जिला ऊना के 172 गांवों की जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से किसानों के सामने पंजीकरण का संकट खड़ा हो गया है। ठेके पर खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। जमीन मालिकों से फर्द नहीं मिलने पर वे ठेके पर ली गई जमीन का ब्योरा कैसे दर्ज करवाएं, यह बड़ा सवाल है।
खाद लेने के लिए किसानों को एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण करवाना होगा। इसके लिए जमीन की फर्द समेत अन्य जरूरी दस्तावेज अनिवार्य हैं। इसके बाद एफएफएस (फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल) पोर्टल पर खाद की बुकिंग करनी होगी। व्यवस्था के तहत जमीन के रिकॉर्ड के अनुसार ही खाद मिलेगी। ऐसे में जिन गांवों का रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं है, वहां के किसानों के लिए पंजीकरण कराना चुनौती बन गया है।
जिले में कई किसान ऐसे हैं, जिनके पास महज 10 से 50 कनाल अपनी जमीन है जबकि वे 300 से 500 कनाल तक जमीन ठेके पर लेकर आलू, गेहूं और अन्य फसलें उगाते हैं। ठेके पर ली गई जमीन की फर्द उनके नाम पर नहीं होती और जमीन मालिक भी दस्तावेज देने से कई बार इन्कार कर देते हैं। ऐसे में अपनी जमीन के रिकॉर्ड के आधार पर वे सैकड़ों कनाल में खेती के लिए खाद की जरूरत कैसे पूरी करेंगे। किसानों ने मांग की है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड की समस्या दूर होने तक वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ताकि दस्तावेजों के अभाव में उन्हें खाद से वंचित न रहना पड़े।
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किसानों के अनुसार, पिछले कई दिनों से गोदामों में खाद की उपलब्धता को लेकर परेशानी है। गुड़ाई के व्यस्त समय में दस्तावेज जुटाने और ऑनलाइन बुकिंग की प्रक्रिया ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
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जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष अमित ठाकुर ने बताया कि जिला के 172 गांवों की जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं होना गंभीर समस्या है। खाद वितरण की व्यवस्था लागू करने से पहले जमीनी स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए था। जब किसान के पास ऑनलाइन फर्द ही नहीं है तो वह पंजीकरण कैसे करवाएगा? ठेके पर खेती करने वालों के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए ताकि वे खाद से वंचित न रहें।
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किसान दिलबाग कंग ने बताया कि कई किसान अपनी थोड़ी-सी जमीन के साथ सैकड़ों कनाल जमीन ठेके पर लेकर खेती करते हैं। जमीन मालिक फर्द नहीं देते तो किसान दस्तावेज कहां से लाए? अपनी जमीन के रिकॉर्ड के आधार पर इतनी बड़ी खेती के लिए खाद की जरूरत पूरी करना संभव नहीं है। सरकार को इसका व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।
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किसान सोनू कुमार ने बताया कि आलू की गुड़ाई के दौरान यूरिया खाद की जरूरत है। एक तरफ खाद की उपलब्धता को लेकर परेशानी है, दूसरी तरफ पंजीकरण और बुकिंग की शर्तें मुश्किल बढ़ा रही हैं। सरकार को समय पर खाद उपलब्ध करवाने के साथ पंजीकरण की प्रक्रिया सरल बनानी चाहिए।
ऊना जिला में प्रतिदिन औसतन 200 किसान ऑनलाइन पंजीकरण कर रहे हैं। जिन गांवों का अभी जमीनी रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध नहीं, उसके लिए राजस्व विभाग से लगातार संपर्क में हैं। इस संबंध में उपायुक्त ऊना जल्द एक बैठक लेंगे। उसके बाद आगामी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।
-डॉ. प्रेम ठाकुर, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग
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खाद लेने के लिए किसानों को एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण करवाना होगा। इसके लिए जमीन की फर्द समेत अन्य जरूरी दस्तावेज अनिवार्य हैं। इसके बाद एफएफएस (फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल) पोर्टल पर खाद की बुकिंग करनी होगी। व्यवस्था के तहत जमीन के रिकॉर्ड के अनुसार ही खाद मिलेगी। ऐसे में जिन गांवों का रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं है, वहां के किसानों के लिए पंजीकरण कराना चुनौती बन गया है।
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जिले में कई किसान ऐसे हैं, जिनके पास महज 10 से 50 कनाल अपनी जमीन है जबकि वे 300 से 500 कनाल तक जमीन ठेके पर लेकर आलू, गेहूं और अन्य फसलें उगाते हैं। ठेके पर ली गई जमीन की फर्द उनके नाम पर नहीं होती और जमीन मालिक भी दस्तावेज देने से कई बार इन्कार कर देते हैं। ऐसे में अपनी जमीन के रिकॉर्ड के आधार पर वे सैकड़ों कनाल में खेती के लिए खाद की जरूरत कैसे पूरी करेंगे। किसानों ने मांग की है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड की समस्या दूर होने तक वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ताकि दस्तावेजों के अभाव में उन्हें खाद से वंचित न रहना पड़े।
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किसानों के अनुसार, पिछले कई दिनों से गोदामों में खाद की उपलब्धता को लेकर परेशानी है। गुड़ाई के व्यस्त समय में दस्तावेज जुटाने और ऑनलाइन बुकिंग की प्रक्रिया ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष अमित ठाकुर ने बताया कि जिला के 172 गांवों की जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं होना गंभीर समस्या है। खाद वितरण की व्यवस्था लागू करने से पहले जमीनी स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए था। जब किसान के पास ऑनलाइन फर्द ही नहीं है तो वह पंजीकरण कैसे करवाएगा? ठेके पर खेती करने वालों के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए ताकि वे खाद से वंचित न रहें।
किसान दिलबाग कंग ने बताया कि कई किसान अपनी थोड़ी-सी जमीन के साथ सैकड़ों कनाल जमीन ठेके पर लेकर खेती करते हैं। जमीन मालिक फर्द नहीं देते तो किसान दस्तावेज कहां से लाए? अपनी जमीन के रिकॉर्ड के आधार पर इतनी बड़ी खेती के लिए खाद की जरूरत पूरी करना संभव नहीं है। सरकार को इसका व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।
किसान सोनू कुमार ने बताया कि आलू की गुड़ाई के दौरान यूरिया खाद की जरूरत है। एक तरफ खाद की उपलब्धता को लेकर परेशानी है, दूसरी तरफ पंजीकरण और बुकिंग की शर्तें मुश्किल बढ़ा रही हैं। सरकार को समय पर खाद उपलब्ध करवाने के साथ पंजीकरण की प्रक्रिया सरल बनानी चाहिए।
ऊना जिला में प्रतिदिन औसतन 200 किसान ऑनलाइन पंजीकरण कर रहे हैं। जिन गांवों का अभी जमीनी रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध नहीं, उसके लिए राजस्व विभाग से लगातार संपर्क में हैं। इस संबंध में उपायुक्त ऊना जल्द एक बैठक लेंगे। उसके बाद आगामी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।
-डॉ. प्रेम ठाकुर, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग