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चार दिन में केवल एक किसान ने बेची 21 क्विंटल गेहूं
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला की कांगड़ व टकारला मंडी में गेहूं की खरीद प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक केवल एक ही किसान अपनी 21 क्विंटल फसल बेचने के लिए टकारला मंडी पहुंचा। जिला मंडी प्रशासन की मानें तो अभी क्षेत्र के अधिकतर हिस्सों में गेहूं की कटाई शुरू नहीं हुई है इसलिए कम संख्या में किसान फसल की बिक्री करने पहुंच रहे हैं।
गेहूं खरीद के लिए व्यापारी भी सीधे तौर पर किसानों से संपर्क कर हैं। व्यापारी गेहूं के दाम भी सरकारी मंडियों के मुकाबले अधिक दे रहे हैं। मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 है और व्यापारी 2050 रुपये प्रति क्लिंटल के दे रहे हैं। दामों में सीधा 35 रुपये का अंतर है। व्यापारियों को फसल बेचने से किसानों को आनलाइन बुकिंग और मंडी जाने का झंझट भी नहीं रहता। ऐसे में किसान व्यापारियों को फसल बेचने को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं।
कृषि उत्पाद बाजार समिति ने इस बार 1.20 लाख क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कांगड़ और टकरला में बनाए बिक्री केंद्रों में तैयारियां पूरी हैं। किसानों की सुविधा के लिए बीते साल के मुकाबले इस बार व्यवस्थाएं भी बेहतर की गई हैं। यहां गेहूं की सफाई करने वाली मशीनों की संख्या भी 10 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है।
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इससे किसानों को फसल बेचने को अधिक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके बावजूद अभी तक केवल एक किसान ने 30 अप्रैल को गेहूं बेचने के लिए आनलाइन बुकिंग की है। उधर, जिला कृषि उत्पाद बाजार समिति के भूपेंद्र ठाकुर ने बताया कि जिला में गेहूं खरीद के लिए दोनों केंद्र तैयार हैं। आने वाले दिनों में मंडी पहुंचने वाले किसानों की संख्या निश्चित तौर पर बढ़ेगी। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि किसान मंडी में फसल बेचने से पहले उसके सैंपल जरूर जांच करवाएं ताकि दाने में नमी कितनी है इसका पता लग सके।
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ऊना। जिला की कांगड़ व टकारला मंडी में गेहूं की खरीद प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक केवल एक ही किसान अपनी 21 क्विंटल फसल बेचने के लिए टकारला मंडी पहुंचा। जिला मंडी प्रशासन की मानें तो अभी क्षेत्र के अधिकतर हिस्सों में गेहूं की कटाई शुरू नहीं हुई है इसलिए कम संख्या में किसान फसल की बिक्री करने पहुंच रहे हैं।
गेहूं खरीद के लिए व्यापारी भी सीधे तौर पर किसानों से संपर्क कर हैं। व्यापारी गेहूं के दाम भी सरकारी मंडियों के मुकाबले अधिक दे रहे हैं। मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 है और व्यापारी 2050 रुपये प्रति क्लिंटल के दे रहे हैं। दामों में सीधा 35 रुपये का अंतर है। व्यापारियों को फसल बेचने से किसानों को आनलाइन बुकिंग और मंडी जाने का झंझट भी नहीं रहता। ऐसे में किसान व्यापारियों को फसल बेचने को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं।
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कृषि उत्पाद बाजार समिति ने इस बार 1.20 लाख क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कांगड़ और टकरला में बनाए बिक्री केंद्रों में तैयारियां पूरी हैं। किसानों की सुविधा के लिए बीते साल के मुकाबले इस बार व्यवस्थाएं भी बेहतर की गई हैं। यहां गेहूं की सफाई करने वाली मशीनों की संख्या भी 10 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है।
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इससे किसानों को फसल बेचने को अधिक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके बावजूद अभी तक केवल एक किसान ने 30 अप्रैल को गेहूं बेचने के लिए आनलाइन बुकिंग की है। उधर, जिला कृषि उत्पाद बाजार समिति के भूपेंद्र ठाकुर ने बताया कि जिला में गेहूं खरीद के लिए दोनों केंद्र तैयार हैं। आने वाले दिनों में मंडी पहुंचने वाले किसानों की संख्या निश्चित तौर पर बढ़ेगी। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि किसान मंडी में फसल बेचने से पहले उसके सैंपल जरूर जांच करवाएं ताकि दाने में नमी कितनी है इसका पता लग सके।