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Una News: फर्जी चेक से धोखाधड़ी मामले में पांच आरोपियों को सात साल की कैद
Fri, 11 Sep 2026 12:42 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 11 Sep 2026 12:42 AM IST
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अंब (ऊना)। अंब की अदालत ने फर्जी चेक से धोखाधड़ी मामले में पांच आरोपियों को सात साल की कैद और डेढ़-डेढ़ लाख जुर्माने की सजा सुनाई है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (एसीजेएम) अंब जतिंद्र कुमार की अदालत ने फर्जी चेक लगाकर बैंकों से लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने के करीब 15 साल पुराने मामले में पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 468, 120-बी के तहत 7 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर दोषियों को 1 साल का अतिरिक्त साधारण कारावास काटना होगा। इसके साथ ही धारा 467, 471, 120-बी के तहत 7 साल के कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने का फैसला दिया गया, जिसे न भरने पर 2 साल की साधारण कैद भुगतनी होगी। सजा पाने वाले दोषियों में केवल कृष्ण निवासी मोईन, रणजीत पठानिया पुत्र शमशेर सिंह निवासी मैहरका (तहसील नूरपुर, जिला कांगड़ा), दीपक कुमार पुत्र राजवीर सिंह निवासी गुन (थाना परतापुर, जिला मेरठ, उत्तर प्रदेश), नितिन त्यागी पुत्र भूलन त्यागी निवासी हरमुखपुरी मोदीनगर (जिला गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश) और प्रवीन खुराना पुत्र दर्शन लाल निवासी सन्तपुरा मोदीनगर (जिला गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश) शामिल हैं।
मामला 17 सितंबर 2011 का है, जब पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) शाखा भरवाईं के तत्कालीन प्रबंधक नरेश कुमार धीमान ने थाना चिंतपूर्णी में धोखाधड़ी की लिखित शिकायत दर्ज करवाई थी। पुलिस ने मामले में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों के आधार पर पांचों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला न्यायवादी शिखा राणा ने अदालत में गवाहों और साक्ष्यों को पेश कर मामले की पैरवी की जबकि नायब कोर्ट निशा रानी ने भी मामले में सराहनीय भूमिका निभाई।
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मामला 17 सितंबर 2011 का है, जब पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) शाखा भरवाईं के तत्कालीन प्रबंधक नरेश कुमार धीमान ने थाना चिंतपूर्णी में धोखाधड़ी की लिखित शिकायत दर्ज करवाई थी। पुलिस ने मामले में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों के आधार पर पांचों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला न्यायवादी शिखा राणा ने अदालत में गवाहों और साक्ष्यों को पेश कर मामले की पैरवी की जबकि नायब कोर्ट निशा रानी ने भी मामले में सराहनीय भूमिका निभाई।
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