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जिले में फिर मंडराया खाद का संकट, अधिकतर गोदाम खाली
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फिर गहराया खाद का संकट,
खाली पड़े अधिकतम गोदाम
इफ्को और सहकारी समितियों के गोदामों में 10 दिन बाद ही खत्म हो गई खाद
मुख्य गोदामों में बची 100 से कम बोरियां, बुधवार को आई थी 15 टन खेप
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। इफ्को और सहकारी समितियों के गोदामों में 14 नवंबर को पहुंची 12-32-16 एनपीके खाद का भंडार 10 दिन बाद लगभग खत्म हो गया है। क्षेत्र के कुछ मुख्य गोदामों में 100 से कम खाद की बोरियां बची हैं। अन्य गोदामों के लिए बहुत कम मात्रा में खाद जारी की गई, जो दो से चार दिन में खत्म हो गई। गेहूं की बिजाई में जुटे किसानों को खाद नहीं मिल रही है। उन्हें अन्य विकल्पों की मदद से बिजाई करनी पड़ रही है। 15 दिसंबर के बाद आलू की पक्की फसल की बिजाई शुरू हो जाएगी। इसके लिए 200 से 250 टन खाद की जरूरत रहती है। इफ्को प्रबंधन ने सरकार को मांग तो भेजी है, लेकिन अभी इसे मंजूरी नहीं मिली है।
हरोली क्षेत्र के दौलतपुर गांव के किसान रणवीर सिंह ने कहा कि उन्होंने 320 कनाल जमीन में धान लगाया था। कटान के बाद जब गेहूं की बिजाई करने लगे तो स्थानीय सहकारी समिति के गोदाम में 12-32-16 खाद नहीं मिली। उन्हें कम से कम 20 क्विंटल खाद की जरूरत थी। इतनी मात्रा में खाद आसपास कहीं नहीं मिली। मजबूर होकर उन्हें हिमफेड की सिंगल सुपर फास्फेट का इस्तेमाल कर बिजाई की। उधर, साल भर आलू की खेती करने वाले पंडोगा के किसान मदन लाल ने बताया कि दिसंबर के आखिरी सप्ताह में आलू की पक्की फसल की बिजाई शुरू हो जाएगी। यह फसल चार महीने के लिए होती है। इसकी बिजाई से पहले 12-32-16 का इस्तेमाल होता है। करीब 250 कनाल जमीन पर खेती करनी है। इसके लिए 30 से 40 बोरी खाद की जरूरत पड़ेगी। अगर समय रहते खाद नहीं पहुंची तो समस्या खड़ी हो जाएगी। सहकारी समिति पंडोगा में इफ्को के वितरक मनजीत सैणी ने कहा कि बीते बुधवार को उनके गोदाम में 100 बोरी खाद आई है। इसमें 90 बोरियां अभी बची हैं। आलू की बिजाई के समय उन्हें 35 सौ के करीब खाद की बोरियों की आवश्यकता रहती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समय रहते खाद की नई खेप पहुंच जाएगी। इफ्को के एरिया प्रबंधक भुवनेश पठानिया ने बताया कि उन्होंने 250 टन खाद की मांग सरकार के समक्ष रखी है। इस पर मंजूरी की स्थिति एक दिसंबर तक स्पष्ट हो जाएगी। जिले के कुछ गोदामों में खाद की बिक्री जारी है। जरूरतमंद किसान वहां से खरीद कर सकते हैं।
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खाली पड़े अधिकतम गोदाम
इफ्को और सहकारी समितियों के गोदामों में 10 दिन बाद ही खत्म हो गई खाद
मुख्य गोदामों में बची 100 से कम बोरियां, बुधवार को आई थी 15 टन खेप
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। इफ्को और सहकारी समितियों के गोदामों में 14 नवंबर को पहुंची 12-32-16 एनपीके खाद का भंडार 10 दिन बाद लगभग खत्म हो गया है। क्षेत्र के कुछ मुख्य गोदामों में 100 से कम खाद की बोरियां बची हैं। अन्य गोदामों के लिए बहुत कम मात्रा में खाद जारी की गई, जो दो से चार दिन में खत्म हो गई। गेहूं की बिजाई में जुटे किसानों को खाद नहीं मिल रही है। उन्हें अन्य विकल्पों की मदद से बिजाई करनी पड़ रही है। 15 दिसंबर के बाद आलू की पक्की फसल की बिजाई शुरू हो जाएगी। इसके लिए 200 से 250 टन खाद की जरूरत रहती है। इफ्को प्रबंधन ने सरकार को मांग तो भेजी है, लेकिन अभी इसे मंजूरी नहीं मिली है।
हरोली क्षेत्र के दौलतपुर गांव के किसान रणवीर सिंह ने कहा कि उन्होंने 320 कनाल जमीन में धान लगाया था। कटान के बाद जब गेहूं की बिजाई करने लगे तो स्थानीय सहकारी समिति के गोदाम में 12-32-16 खाद नहीं मिली। उन्हें कम से कम 20 क्विंटल खाद की जरूरत थी। इतनी मात्रा में खाद आसपास कहीं नहीं मिली। मजबूर होकर उन्हें हिमफेड की सिंगल सुपर फास्फेट का इस्तेमाल कर बिजाई की। उधर, साल भर आलू की खेती करने वाले पंडोगा के किसान मदन लाल ने बताया कि दिसंबर के आखिरी सप्ताह में आलू की पक्की फसल की बिजाई शुरू हो जाएगी। यह फसल चार महीने के लिए होती है। इसकी बिजाई से पहले 12-32-16 का इस्तेमाल होता है। करीब 250 कनाल जमीन पर खेती करनी है। इसके लिए 30 से 40 बोरी खाद की जरूरत पड़ेगी। अगर समय रहते खाद नहीं पहुंची तो समस्या खड़ी हो जाएगी। सहकारी समिति पंडोगा में इफ्को के वितरक मनजीत सैणी ने कहा कि बीते बुधवार को उनके गोदाम में 100 बोरी खाद आई है। इसमें 90 बोरियां अभी बची हैं। आलू की बिजाई के समय उन्हें 35 सौ के करीब खाद की बोरियों की आवश्यकता रहती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समय रहते खाद की नई खेप पहुंच जाएगी। इफ्को के एरिया प्रबंधक भुवनेश पठानिया ने बताया कि उन्होंने 250 टन खाद की मांग सरकार के समक्ष रखी है। इस पर मंजूरी की स्थिति एक दिसंबर तक स्पष्ट हो जाएगी। जिले के कुछ गोदामों में खाद की बिक्री जारी है। जरूरतमंद किसान वहां से खरीद कर सकते हैं।
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