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अब बाहर गंदगी फंकी तो डस्टबिन कहेगा यूज मी
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विनायक राणा
- फोटो : Una
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ऊना। ...अब अगर आप कहीं डस्टबिन के बाहर कूड़ा फेंकते हैं तो जरा संभल जाएं। कोई और नहीं बल्कि डस्टबिन ही आपको शर्मिंदा कर सकता है। जी हां! कूड़ा आसपास फेंकते वक्त डस्टबिन खुद आवाज लगाकर कहेगा-प्लीज यूज मी।
दिलचस्प यह है कि इस तरह का आविष्कार ऊना जिला के एक निजी स्कूल की सातवीं में छात्र ने किया है। उपमंडल बंगाणा के तहत कुटलैहड़ पब्लिक स्कूल बल्ह के सातवीं के विनायक राणा का डस्टबिन मॉडल 7वीं नेशनल प्रतियोगिता के लिए चयनित हो गया है। विनायक राणा ने डस्टबिन मॉडल इंस्पायर अवार्ड स्कीम मानक के तहत तैयार किया है। इस डस्टबिन की खासियत है कि यदि इसके आसपास कोई कूड़ा कचरा पड़ा है तो प्लीज यूज मी की आवाज आती है। जब कूड़ा इसके अंदर डालेंगे तो यह धन्यवाद भी करेगा। इस डस्टबिन के नीचे टायर भी लगे हैं। इसे कहीं भी शिफ्ट किया जा सकता है। छात्र के इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारा जाता है तो यह लोगों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित करेगा। जिला नोडल अधिकारी प्रदीप सिंह ने बताया कि अगले साल विनायक राणा को मॉडल के साथ जापान जाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि विनायक के मॉडल की दूरदर्शन डॉक्यूमेंटरी भी तैयार करेगा।
इंफ्रारेड-सेंसर से करता है काम
यह मॉडल एक आधार के रूप में प्लाई बोर्ड का उपयोग करके कार्डबोर्ड से तैयार किया गया है। ध्वनि परिवर्तन करने वाले डस्टबिन में दो इंफ्रारेड-सेंसर लगाए गए हैं जो दो बैटरियों के साथ तारों से जुड़े हैं। ये सेंसर डस्टबिन के बाहर कचरा फेंकने पर हरकत करने के साथ ध्वनि करते हैं। सेंसर इसका पता लगाता है और बीप सेकंड आईआर सेंसर की आवाज पैदा करता है, फिर स्वचालित रूप से बिन के ढक्कन को खोलता है। जब व्यक्ति इसमें कचरा डालता है, तो यह स्वचालित रूप से ढक्कन को बंद कर देगा। यह उपयोगकर्ता की हाइजीनिक स्थिति को बनाए रखने में मदद करता है। यह नया डस्टबिन हाइड्रोलिक सिस्टम से संचालित है।
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दिलचस्प यह है कि इस तरह का आविष्कार ऊना जिला के एक निजी स्कूल की सातवीं में छात्र ने किया है। उपमंडल बंगाणा के तहत कुटलैहड़ पब्लिक स्कूल बल्ह के सातवीं के विनायक राणा का डस्टबिन मॉडल 7वीं नेशनल प्रतियोगिता के लिए चयनित हो गया है। विनायक राणा ने डस्टबिन मॉडल इंस्पायर अवार्ड स्कीम मानक के तहत तैयार किया है। इस डस्टबिन की खासियत है कि यदि इसके आसपास कोई कूड़ा कचरा पड़ा है तो प्लीज यूज मी की आवाज आती है। जब कूड़ा इसके अंदर डालेंगे तो यह धन्यवाद भी करेगा। इस डस्टबिन के नीचे टायर भी लगे हैं। इसे कहीं भी शिफ्ट किया जा सकता है। छात्र के इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारा जाता है तो यह लोगों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित करेगा। जिला नोडल अधिकारी प्रदीप सिंह ने बताया कि अगले साल विनायक राणा को मॉडल के साथ जापान जाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि विनायक के मॉडल की दूरदर्शन डॉक्यूमेंटरी भी तैयार करेगा।
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इंफ्रारेड-सेंसर से करता है काम
यह मॉडल एक आधार के रूप में प्लाई बोर्ड का उपयोग करके कार्डबोर्ड से तैयार किया गया है। ध्वनि परिवर्तन करने वाले डस्टबिन में दो इंफ्रारेड-सेंसर लगाए गए हैं जो दो बैटरियों के साथ तारों से जुड़े हैं। ये सेंसर डस्टबिन के बाहर कचरा फेंकने पर हरकत करने के साथ ध्वनि करते हैं। सेंसर इसका पता लगाता है और बीप सेकंड आईआर सेंसर की आवाज पैदा करता है, फिर स्वचालित रूप से बिन के ढक्कन को खोलता है। जब व्यक्ति इसमें कचरा डालता है, तो यह स्वचालित रूप से ढक्कन को बंद कर देगा। यह उपयोगकर्ता की हाइजीनिक स्थिति को बनाए रखने में मदद करता है। यह नया डस्टबिन हाइड्रोलिक सिस्टम से संचालित है।
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