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Una News: बच्चों की सुरक्षा पर संकट, स्कूली वाहनों में बढ़ रही लापरवाही

Thu, 31 Jul 2025 12:37 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 31 Jul 2025 12:37 AM IST
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Children's safety in danger, carelessness increasing in school vehicles
स्कूली वाहनों में नियमों की अनदेखी, बच्चों की सुरक्षा पर खतरा
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दूरदराज से स्कूल जल्द पहुंचने के चक्कर में चालक अपना रहे शॉर्टकट
विभाग की कार्रवाई भी सरकारी स्कूलों तक सीमित
शिक्षा विभाग की टीमें और आरटीओ की ओर से नहीं जांचे जा रहे स्कूली वाहन

संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। जिले में निजी स्कूलों की ओर से बच्चों को लाने और छोड़ने के लिए उपयोग किए जा रहे वाहनों में नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग की ओर से दिशा-निर्देश तो जारी किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर इनका पालन करवाने को लेकर सख्ती नदारद है। अधिकतर स्कूली वाहनों का इस शैक्षणिक सत्र में अब तक कोई औपचारिक निरीक्षण नहीं किया गया है।
हरोली पुलिस ने ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले एक जागरुकता अभियान चलाया था, जिसका कुछ समय तक प्रभाव भी दिखा। अब स्थिति फिर से पहले जैसी हो चुकी है। कई चालकों को बच्चों को लाने के लिए सुबह दो-दो चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिसके चलते वे संपर्क मार्गों से शॉर्टकट अपनाते हैं, जो बड़ी बसों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
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एक सप्ताह में दो हादसे
हरोली के पंडोगा और ईसपुर में एक सप्ताह के भीतर दो स्कूली वाहन हादसों का शिकार हो चुके हैं। 14 जुलाई को एक स्कूल वैन की कार से टक्कर हो गई। गनीमत रही कि कोई बच्चा घायल नहीं हुआ। इसके बाद बीते मंगलवार को एक स्कूल बस संपर्क मार्ग से गुजरते समय पास के खेत में पलट गई, जिससे दो बच्चे घायल हो गए। हादसे किसकी लापरवाही से हुए, यह जांच का विषय है, लेकिन इससे बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं। अधिकतर वाहनों की खिड़कियों पर लोहे की ग्रिल नहीं लगी होती और बच्चों को चलते वाहन से बाहर झांकते हुए देखा जा सकता है, जिससे किसी हादसे की स्थिति में वे आसानी से बाहर गिर सकते हैं।
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वहीं, कई वाहनों में बच्चों को चालक की सीट के पास डैशबोर्ड के करीब बैठा दिया जाता है, जबकि उन्हें सुरक्षित दूरी पर पीछे बैठना चाहिए। इसके अलावा कई वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को लेकर चलते हैं, और कई बार बच्चे खड़े होकर सफर करने को मजबूर होते हैं। कुछ वाहन तो जर्जर अवस्था में भी सड़कों पर दौड़ाए जा रहे हैं।
स्कूलों ने ट्रांसपोर्टरों को सौंप दी जिम्मेदारी
जिले के कई बड़े निजी स्कूलों ने बच्चों के परिवहन की जिम्मेदारी निजी ट्रांसपोर्टरों को सौंप दी है। वाहनों पर स्कूल का नाम लिखा होता है, लेकिन असली मालिक निजी ट्रांसपोर्टर ही होते हैं। इन वाहनों को चलाने वाले चालक या तो अनुभवहीन होते हैं या फिर सेवानिवृत्त चालक होते हैं, जिससे हादसे की आशंका और बढ़ जाती है। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में स्कूल प्रशासन जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर ट्रांसपोर्टर पर दोष डाल देता है, जबकि अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूल प्रबंधन पर विश्वास करते हैं।

प्रशासन का आश्वासन, जल्द होगा निरीक्षण
जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक सोमलाल धीमान ने कहा कि स्कूली वाहनों के निरीक्षण के लिए जल्द ही विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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