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बर्ड फ्लू को लेकर मुर्गी पालक बरतें एहतिहात
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ऊना। देश में बर्ड फ्लू की आहट के साथ पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। पशु पालन विभाग ने बर्ड फ्लू को लेकर मुर्गी पालकों को एहतियात बरतने की सलाह दी है। विभाग ने पक्षियों अथवा मुर्गियों की अचानक मौत होने पर तुरंत निकटतम पशु चिकित्सा संस्थान को जानकारी देने की अपील की है।
पशु पालन विभाग के उप निदेशक डॉ. जय सिंह सेन ने बताया कि बर्ड फ्लू केरल से शुरु हुआ है और अब यह जयपुर तक पहुंच गया है। बर्ड फ्लू हिमाचल तक न पहुंचे, इसके दृष्टिगत मुर्गी पालक और लोग एहतियात बरतें।
उन्होंने जिला ऊना के मुर्गी पालकों और लोगों से अपील की है कि प्रवासी पक्षियों से फ्लू का वायरस पालतू मुर्गियों में न फैले, इसके लिए बीमारी की रोकथाम और नियंत्रण के लिए जरूरी एहतियात बरतना आवश्यक हैं।
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डॉ. सेन ने कहा कि मुर्गी पालकों को फार्म और बाड़े में जाने के लिए अलग कपड़ों और जूतों का इस्तेमाल करना चाहिए। फार्म और बाड़े के बाहर फुटपाथ बनाएं, जिसमें फिनायल अथवा अन्य कीटाणुनाशक घोल का प्रयोग करें।
फार्म और बाड़े में जाने से पहले साबुन से हाथ धोकर जाएं। चारों तरफ नियमित रूप से चूने का छिड़काव करें। फार्म में पड़े छिद्रों को बंद करें, जिनमें चूहे और नेवले अंदर प्रवेश न कर सकें। जिन मुर्गी पालकों ने कुत्ते पाल रखें है, उन्हें बांध कर रखें।
इन बातों का भी रखें ख्याल
मुर्गी पालकों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि मांसाहारी और प्रवासी पक्षियों का मल किसी भी तरीके से फार्म में रखी मुर्गियों के संपर्क में न आए। मुर्गियां के लिए दाने-पानी की व्यवस्था बाड़े में उपलब्ध करवाएं। कूड़े का उचित प्रबंध करना चाहिए जिससे कि अन्य पक्षी उस तरफ आकर्षित न हों। अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 18001808006 , 0177-2830089 पर संपर्क करें।
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पशु पालन विभाग के उप निदेशक डॉ. जय सिंह सेन ने बताया कि बर्ड फ्लू केरल से शुरु हुआ है और अब यह जयपुर तक पहुंच गया है। बर्ड फ्लू हिमाचल तक न पहुंचे, इसके दृष्टिगत मुर्गी पालक और लोग एहतियात बरतें।
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उन्होंने जिला ऊना के मुर्गी पालकों और लोगों से अपील की है कि प्रवासी पक्षियों से फ्लू का वायरस पालतू मुर्गियों में न फैले, इसके लिए बीमारी की रोकथाम और नियंत्रण के लिए जरूरी एहतियात बरतना आवश्यक हैं।
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डॉ. सेन ने कहा कि मुर्गी पालकों को फार्म और बाड़े में जाने के लिए अलग कपड़ों और जूतों का इस्तेमाल करना चाहिए। फार्म और बाड़े के बाहर फुटपाथ बनाएं, जिसमें फिनायल अथवा अन्य कीटाणुनाशक घोल का प्रयोग करें।
फार्म और बाड़े में जाने से पहले साबुन से हाथ धोकर जाएं। चारों तरफ नियमित रूप से चूने का छिड़काव करें। फार्म में पड़े छिद्रों को बंद करें, जिनमें चूहे और नेवले अंदर प्रवेश न कर सकें। जिन मुर्गी पालकों ने कुत्ते पाल रखें है, उन्हें बांध कर रखें।
इन बातों का भी रखें ख्याल
मुर्गी पालकों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि मांसाहारी और प्रवासी पक्षियों का मल किसी भी तरीके से फार्म में रखी मुर्गियों के संपर्क में न आए। मुर्गियां के लिए दाने-पानी की व्यवस्था बाड़े में उपलब्ध करवाएं। कूड़े का उचित प्रबंध करना चाहिए जिससे कि अन्य पक्षी उस तरफ आकर्षित न हों। अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 18001808006 , 0177-2830089 पर संपर्क करें।