Alert! धंस रही पर्यटन नगरी मैक्लोडगंज, धर्मगुरु दलाई लामा के मठ को भी खतरा, विभाग को रिपोर्ट का इंतजार
हिमाचल प्रदेश की सबसे चर्चित जगह पर्यटन नगरी मैक्लोडगंज और आसपास भू धंसाव हो रहा है। भूकंप की दृष्टि से यह क्षेत्र अति संवेदनशील है।
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पर्यटन नगरी मैक्लोडगंज और इसके आसपास के क्षेत्र में बड़े स्तर पर भू धंसाव हो रहा है। मैक्लोडगंज, फरसेटगंज, जोगीबाड़ा रोड, टिहरा लाइन, कालापुल और आसपास के क्षेत्रों में कई जगह सड़कें और जमीन धंस रही हैं। धर्मगुरु दलाई लामा के मठ को भी भू-धंसाव से खतरा पैदा हो गया है।
धर्मशाला से मैक्लोडगंज की ओर जाने वाली मुख्य सड़क जगह-जगह डेढ़ से दो फीट नीचे धंस गई है। डंगे गिर गए हैं। सड़कों पर गहरी दरारें हैं। इस मार्ग पर वोल्वो बसों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा और निर्वासित तिब्बत सरकार का मुख्यालय भी मैक्लोडगंज में है। मैक्लोडगंज, धर्मकोट, नड्डी, सतोवरी, फरसेटगंज, जोगीबाड़ा रोड और आसपास के क्षेत्र में करीब 400 के करीब होटल, रेस्तरां और अन्य शॉपिंग मॉल हैं। यहां हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं। फरसेटगंज और टिहरा लाइन में छावनी क्षेत्र है। यहां पर भारतीय सेना के जवान और अधिकारी रहते हैं। इसके अलावा केंद्रीय विद्यालय भी है।
भूकंप की दृष्टि से यह क्षेत्र अति संवेदनशील है। धर्मशाला और मैक्लोडगंज का क्षेत्र सिस्मिक जोन 4-5 में शामिल है। बावजूद इसके इन क्षेत्रों में बड़े स्तर पर निर्माण गतिविधियां जारी हैं। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग की ओर से यहां पर भू धंसाव के चलते सर्वे भी करवाया गया है, लेकिन अभी तक इसकी रिपोर्ट नहीं आई है। समय रहते ध्यान न दिया गया तो उत्तराखंड के जोशीमठ की तरह यहां पर भी वैसे ही हालात होने की आशंका है। स्थानीय निवासी रविकांत शर्मा, राजेश ठाकुर और विवेक पठानिया ने कहा कि सरकार और जिला प्रशासन को इसे गंभीरता से लेते हुए बड़े स्तर पर हो रहे बहुमंजिला भवनों के निर्माण पर रोक लगानी चाहिए।
मैक्लोडगंज और आसपास के क्षेत्र में भूस्खलन हो रहा है। इस बारे में भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग से सर्वे रिपोर्ट मांगी गई है। नगर निगम और टीसीपी को यहां होने वाली विभिन्न निर्माण गतिविधियों पर नजर रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, ताकि नियमों की अवहेलना न हो - हेमराज बैरवा, उपायुक्त, कांगड़ा
टीसीपी के पास नड्डी और आसपास का कुछ क्षेत्र है। शेष क्षेत्र नगर निगम के अधीन है। मैक्लोडगंज और इसके आसपास के क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्य की अनुमति देना नगर निगम का काम है - शैलजा इस्सर, ग्राम एवं नगर नियोजन अधिकारी, धर्मशाला
नगर निगम क्षेत्र में नियमों के तहत ही निर्माण गतिविधियां चल रही हैं। मैक्लोडगंज और इसके आसपास के क्षेत्र में हो रहे भू धंसाव का मामला ध्यान में है - जफर इकबाल, आयुक्त नगर निगम, धर्मशाला
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी में रहते हुए इस क्षेत्र में हो रहे भू धंसाव का वर्ष 1998 के आसपास सर्वे किया था। भूस्खलन वाली करीब 25 विभिन्न जगहें चिह्नित की गई थीं। भू धंसाव के कई कारण पाए थे, लेकिन अब नए सर्वे की जरूरत है, ताकि उपायों पर विचार किया जा सके - डॉ. अंबरीश कुमार महाजन, भू-वैज्ञानिक, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विवि धर्मशाला