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मुख्य पेयजल लाइन से पहुंच रहा हाइड्रेंटों में पानी
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दमकल विभाग कार्यालय सोलन।
- फोटो : SOLAN
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सोलन। दमकल वाहनों में पानी भरने और हाइड्रेंटों के लिए अलग पाइपलाइन नहीं है। मुख्य पेयजल पाइपलाइन से ही दमकल विभाग को पानी की हो रही है। इस पाइपलाइन में सप्लाई 24 घंटे नहीं रहती। ऐसे में आपात स्थिति में दमकल विभाग को पानी की सप्लाई छोड़ने के लिए नगर निगम के कर्मचारी को सप्लाई के लिए कहना पड़ता है। जब निगम कर्मी हाइड्रेंट में पानी छोड़ेगा, तभी यहां पानी भर सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, दमकल विभाग को शहर में बिछी मुख्य पाइपलाइन से ही पानी दिया जा रहा है जिसका नियंत्रण नगर निगम के पास है। आग की घटना के दौरान फायर गाड़ियों में पानी भरने के लिए अग्निशमन विभाग को नगर निगम पर निर्भर रहना पड़ता है।
इस कारण गाड़ी भरने में अधिक समय लगता है। लोगों के घरों को पेयजल सप्लाई करने वाली मुख्य लाइन से ही हाइड्रेंट को जोड़ा गया है। विभाग को पानी की आवश्यकता होती है तो पहले निगम के कर्मचारी को फोन पर सूचित कर पानी को खुलवाना पड़ता है। इसके बाद निगम कर्मचारी मुख्य स्टोरेज टैंक पर जाकर सप्लाई को खोलता है। लोगों के निजी कनेक्शन तक पानी पहुंचने के बाद हाइड्रेंट तक पानी पहुंचता है। इस कारण आपात स्थिति में गाड़ी में समय पर पानी नहीं भरा जाता।
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यहां से भरा जा रहा गाड़ियों में पानी
शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 26 हाइड्रेंट लगाए गए हैं। इनकी देखरेख का जिम्मा पहले नगर निगम के पास है। 26 में से तीन हाइड्रेंट पर विभाग की गाड़ियों में पानी भरा जाता है। चंबाघाट, सीटी चौकी सोलन और डिग्री कॉलेज के समीप हाइड्रेंट में दमकल की गाड़ी आसानी से पहुंच जाती है और यहां जाम की समस्या भी कम है। इनमें पानी की सप्लाई 24 घंटे नहीं रहती। सप्लाई छोड़ने के लिए निगम पर निर्भर रहना पड़ता है। जब निगम कर्मी हाइड्रेंट में पानी छोड़ेगा, तभी यहां पानी भर सकते हैं।
अग्निशमन कार्यालय में हाइड्रेंट लगाने की भेजी है मांग
दमकल विभाग के फायर अफसर देवेंद्र दत्त शर्मा ने बताया कि नगर निगम और जिला प्रशासन को पहले भी सूचित किया गया है। हाल ही में भी फायर ऑफिस के बाहर एक हाइड्रेंट लगाने की मांग की गई है जिससे गाड़ियों में पानी भरा जा सके। उन्होंने बताया कि वर्तमान में तीन क्षेत्रों से पानी भरा जा रहा है। ये सभी हाइड्रेंट मुख्य पेयजल लाइन से ही जुड़े हैं।
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जानकारी के अनुसार, दमकल विभाग को शहर में बिछी मुख्य पाइपलाइन से ही पानी दिया जा रहा है जिसका नियंत्रण नगर निगम के पास है। आग की घटना के दौरान फायर गाड़ियों में पानी भरने के लिए अग्निशमन विभाग को नगर निगम पर निर्भर रहना पड़ता है।
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इस कारण गाड़ी भरने में अधिक समय लगता है। लोगों के घरों को पेयजल सप्लाई करने वाली मुख्य लाइन से ही हाइड्रेंट को जोड़ा गया है। विभाग को पानी की आवश्यकता होती है तो पहले निगम के कर्मचारी को फोन पर सूचित कर पानी को खुलवाना पड़ता है। इसके बाद निगम कर्मचारी मुख्य स्टोरेज टैंक पर जाकर सप्लाई को खोलता है। लोगों के निजी कनेक्शन तक पानी पहुंचने के बाद हाइड्रेंट तक पानी पहुंचता है। इस कारण आपात स्थिति में गाड़ी में समय पर पानी नहीं भरा जाता।
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यहां से भरा जा रहा गाड़ियों में पानी
शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 26 हाइड्रेंट लगाए गए हैं। इनकी देखरेख का जिम्मा पहले नगर निगम के पास है। 26 में से तीन हाइड्रेंट पर विभाग की गाड़ियों में पानी भरा जाता है। चंबाघाट, सीटी चौकी सोलन और डिग्री कॉलेज के समीप हाइड्रेंट में दमकल की गाड़ी आसानी से पहुंच जाती है और यहां जाम की समस्या भी कम है। इनमें पानी की सप्लाई 24 घंटे नहीं रहती। सप्लाई छोड़ने के लिए निगम पर निर्भर रहना पड़ता है। जब निगम कर्मी हाइड्रेंट में पानी छोड़ेगा, तभी यहां पानी भर सकते हैं।
अग्निशमन कार्यालय में हाइड्रेंट लगाने की भेजी है मांग
दमकल विभाग के फायर अफसर देवेंद्र दत्त शर्मा ने बताया कि नगर निगम और जिला प्रशासन को पहले भी सूचित किया गया है। हाल ही में भी फायर ऑफिस के बाहर एक हाइड्रेंट लगाने की मांग की गई है जिससे गाड़ियों में पानी भरा जा सके। उन्होंने बताया कि वर्तमान में तीन क्षेत्रों से पानी भरा जा रहा है। ये सभी हाइड्रेंट मुख्य पेयजल लाइन से ही जुड़े हैं।