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Solan News: प्रशिक्षण से लौटे अध्यापक ने सांझा किया अपने अनुभव
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स्कूल की प्रधानाचार्य को सौंपी लाई गई शिक्षण सामग्री
सांस्कृतिक स्त्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र उदयपुर में हुआ प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला (सोलन)। सांस्कृतिक स्त्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र उदयपुर राजस्थान से बीस दिनों का प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे पंजेहरा स्कूल के प्रवक्ता जगदीश वर्धन ने अपने विचार स्कूल के विद्यार्थियों के साथ सांझा किए। उन्होंने बताया इस प्रशिक्षण में 12 राज्यों के 57 अध्यापकों ने प्रशिक्षण प्राप्त लिया, इसमें हिमाचल से पांच जिलों कांगड़ा, मंडी, बिलासपुर, सोलन व हमीरपुर से पांच अध्यापक गए थे। प्रशिक्षण में सिखाया गया कि किस तरह से हम अपने पढ़ाने वाले प्रत्येक विषय को अपने विरासती संस्कृति से जोड़ सकते हैं और पठन पठान को बहुत ही उचित तरीके से रोचक बना सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान दो दिनों का शैक्षणिक भ्रमण भी रहा जिसमें सास बहू मंदिर, मंदिरों का शहर एक लिंगजी मंदिर, सहेलियों की बॉडी, मोती मगरी, महाराणा प्रताप सिंह संग्रहालय, रक्त तलाई, चेतक समाधि, फतेह सागर ओर हल्दीघाटी की विस्तृत जानकारी हासिल की। प्रशिक्षण के दौरान प्रयोगात्मक पांच दिनों की गतिविधि भी करवाई गई जिसमें मिट्टी शिल्प कला, मांडना रंगोली, पतंग, बेकार पड़ी वस्तुओं से सजावटी चीज बनाना जैसे आम की गुठलियों से चिड़िया,हिरण कबूतर बनाना, भारत के विभिन्न भाषाओं के लोक प्रसिद्ध गीत , ड्रामा ,थिएटर् इत्यादि सिखाए गए।
स्कूल पहुंचने पर प्रधानाचार्य संगीता ने संस्कृत स्त्रोत व प्रशिक्षण केंद्र उदयपुर से दी गई शिक्षण सामग्री को प्राप्त किया और सभी विद्यार्थियों को इसका महत्व बताया। इस अवसर पर स्कूल प्रबंधन समिति की अध्यक्षा सदन पाल व अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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सांस्कृतिक स्त्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र उदयपुर में हुआ प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला (सोलन)। सांस्कृतिक स्त्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र उदयपुर राजस्थान से बीस दिनों का प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे पंजेहरा स्कूल के प्रवक्ता जगदीश वर्धन ने अपने विचार स्कूल के विद्यार्थियों के साथ सांझा किए। उन्होंने बताया इस प्रशिक्षण में 12 राज्यों के 57 अध्यापकों ने प्रशिक्षण प्राप्त लिया, इसमें हिमाचल से पांच जिलों कांगड़ा, मंडी, बिलासपुर, सोलन व हमीरपुर से पांच अध्यापक गए थे। प्रशिक्षण में सिखाया गया कि किस तरह से हम अपने पढ़ाने वाले प्रत्येक विषय को अपने विरासती संस्कृति से जोड़ सकते हैं और पठन पठान को बहुत ही उचित तरीके से रोचक बना सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान दो दिनों का शैक्षणिक भ्रमण भी रहा जिसमें सास बहू मंदिर, मंदिरों का शहर एक लिंगजी मंदिर, सहेलियों की बॉडी, मोती मगरी, महाराणा प्रताप सिंह संग्रहालय, रक्त तलाई, चेतक समाधि, फतेह सागर ओर हल्दीघाटी की विस्तृत जानकारी हासिल की। प्रशिक्षण के दौरान प्रयोगात्मक पांच दिनों की गतिविधि भी करवाई गई जिसमें मिट्टी शिल्प कला, मांडना रंगोली, पतंग, बेकार पड़ी वस्तुओं से सजावटी चीज बनाना जैसे आम की गुठलियों से चिड़िया,हिरण कबूतर बनाना, भारत के विभिन्न भाषाओं के लोक प्रसिद्ध गीत , ड्रामा ,थिएटर् इत्यादि सिखाए गए।
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स्कूल पहुंचने पर प्रधानाचार्य संगीता ने संस्कृत स्त्रोत व प्रशिक्षण केंद्र उदयपुर से दी गई शिक्षण सामग्री को प्राप्त किया और सभी विद्यार्थियों को इसका महत्व बताया। इस अवसर पर स्कूल प्रबंधन समिति की अध्यक्षा सदन पाल व अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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