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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Students in Solan district compelled to go school by taxi, auto or buses, facing danger due to overload

जान जोखिम में डाल टैक्सी, ऑटो और बसों में स्कूल पहुंच रहे नौनिहाल

Fri, 29 Apr 2022 12:24 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Apr 2022 12:24 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सोलन। जिले में टैक्सियों, ऑटो और बसों में जान जोखिम डाल नौनिहाल स्कूल का सफर तय कर रहे हैं। जिला मुख्यालय में ऑटो और निजी टैक्सियों में जमकर ओवरलोडिंग हो रही है। स्कूल बसों में भी तय सीमा से अधिक विद्याथी ढोए जा रहे हैं।
शिक्षा हब के 50 फीसदी छोटे-बड़े निजी स्कूल प्रबंधन बच्चों को ट्रांसपोर्ट की सुविधा दे रहे हैं लेकिन इस सुविधा के नाम पर कई निजी स्कूल संचालक नौनिहालों की जान खतरे में भी डाल रहे हैं। निजी स्कूल बसों को लेकर तय नियमों को ही पूरा नहीं कर रहे। बीबीएन, परवाणू, कसौली, धर्मपुर, अर्की और कुनिहार समेत अधिकतर क्षेत्रों में कमोबेश हालात एक समान हैं।
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हालांकि इसके लिए स्कूल प्रबंधन के साथ अभिभावक भी कम दोषी नहीं है। कहीं न कहीं पैसा बचाने के चक्कर बचाने में अभिभावक यह नहीं देख रहे है कि जिस निजी वाहन में बच्चे भेज रहे हैं, उसमें पहले से ही क्षमता से अधिक बच्चे बैठाए जा रहे हैं।
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जिला मुख्यालय की बात करें तो शहर के ज्यादातर निजी स्कूलों के लिए ऑटो में बच्चों को ढोया जा रहा है। ऑटो में चालक समेत चार लोगों की बैठने की क्षमता है जबकि इसमें आठ से दस बच्चे बैठाए जा रहे हैं। इसी तरह वैन में भी अतिरिक्त सीटें लगाकर पांच की जगह 10 से 12 बच्चे बैठाए जा रहे हैं।
जिला के कुल स्कूल - 345
वाहनों की सुविधा देने वाले स्कूल -137
अपने स्तर पर अभिभावकों की व्यवस्था -113
पैदल आवाजाही वाले स्कूल - 95
जिले में कुल पंजीकृत स्कूल बसें - 497
स्कूल वाहनों की गति पर हो नियंत्रण
अभिभावक रेखा ने कहा कि स्कूल वैन और बच्चों को ढोने वाले निजी वाहनों की गति पर कोई लगाम नहीं है। बच्चों को लेकर वाहन अधिक स्पीड में आवाजाही करते हैं। उन्होंने स्कूल प्रबंधन और आरटीओ से मांग की है कि स्कूल वाहनों की गति को नियंत्रण करवाया जाए।
स्कूल बसों की फिटनेस की जांच हो
अभिभावक विक्की ने कहा कि कोविड के बीच दो वर्षों के बाद स्कूल खुले हैं, इसमें स्कूल बसों की फिटनेस को लेकर विभाग को निरीक्षण करना चाहिए। स्कूल बसों, वैन समेत ऑटो में बच्चों को ठूस-ठूस कर भरा जा रहा है।
स्कूल प्रबंधन ने नहीं चलाई पूरी बसें
बद्दी के एक अभिभावक ने प्रदीप शर्मा ने बताया कि उनके तीन बच्चे एक निजी स्कूल में पढ़ने जाते हैं लेकिन कोरोना के बाद स्कूल प्रबंधन ने पूरी बसें नहीं चलाई हैं। इससे उनके बच्चों को खड़े होकर जाना पड़ रहा है। स्कूल प्रधानाचार्य को पत्र लिखा है जिस पर प्रधानाचार्य ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
छात्रों को रूटीन में भेजा जा रहा घर
नालागढ़ के निजी स्कूल प्रधानाचार्य घुंगर पाल शर्मा ने बताया कि उनके स्कूल में पांच बसें हैं। साढ़े पांच सौ में से नजदीक के गांवों के दो सौ छात्र पैदल ही घर जाते हैं। बाकी छात्रों को रूटीन में भेजा रहा है। छोटे बच्चों को पहले तथा बड़ों को बाद में छोड़ा जा रहा है। अगर कोई छात्र खड़े होकर आते हैं तो अभिभावक शोर मचा देते हैं। अगर आधी बस के छात्र हो तो भी अलग बस लगानी पड़ती है।

स्कूल बसों का किया जा रहा निरीक्षण
आरटीओ सोलन नरेंद्र चौहान ने बताया कि निजी स्कूल बसों का समय-समय पर निरीक्षण किया जा रहा है। निजी वाहनों में ओवरलोडिंग करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बच्चों को ढोने वाले वाहनों में स्कूल गाइडलाइन के तहत सभी नियमों की पालना करनी होगी।
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