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सोलन में बिना ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट करोड़ों के फ्लैट बेचने पर होगी जांच
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Tue, 07 Jun 2016 12:06 AM IST
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बिल्डरों और अफसरों की मिलीभगत से बिना नगर नियोजन विभाग से ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट लिए करोड़ों के फ्लैट्स की खरीद-फरोख्त के मामले में जल्द ही कार्रवाई हो सकती है।
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मोटी कमाई के चक्कर में कुछ बिल्डरों और अफसरों की मिलीभगत से बिना नगर नियोजन विभाग से ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट लिए करोड़ों के फ्लैट्स की खरीद-फरोख्त के मामले में जल्द ही कार्रवाई हो सकती है। शहर में अपार्टमेंट एक्ट के इन कायदों को दरकिनार करने के मामलों की जांच करवाई जाएगी।
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शिकायतों के आधार पर निदेशक नगर एवं ग्राम योजना विभाग ने उपायुक्त सोलन से नियमानुसार छानबीन कर कार्रवाई कराने और इस कार्रवाई की जानकारी निदेशालय को देने की भी सिफारिश की है। वहीं, उपायुक्त सोलन डॉ. राकेश कंवर का कहना है कि नियमानुसार इस मामले में जांच होगी। जांच में कोताही पर कार्रवाई होगी।
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अमर उजाला ने इस करोड़ों के खेल में अप्रूव नक्शों के तय मानकों को दरकिनार करने का मामला शिकायतों के आधार पर 17 मई को प्रकाशित किया था। जिसमें सूचना के अधिकार नियम के तहत और शिकायतों पर आधारित रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी। बताया गया था कि शहर में कई भवन मालिक नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण करने पर कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
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वहीं, सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर सरकार को करोड़ों की चपत भी लगा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि फ्लैट्स के नाम पर हो रहे गोलमाल में न केवल बिल्डर बल्कि अधिकारी भी बराबर के हिस्सेदार हैं। बिना ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के नप और बिजली बोर्ड की ओर से पानी और बिजली के कनेक्शन जारी करने पर भी सवालिया निशान उठ रहे हैं।
यह हुआ था खुलासा
आरटीआई के तहत तीन मशहूर अपार्टमेंट्स में रजिस्ट्रयों का ब्योरा मांगा गया। सरकार के निर्देश थे कि 18 मई 2015 के पश्चात निदेशालय से आर्डर के बिना ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के कोई भी अपार्टमेंट कॉलोनी की रजिस्ट्रेशन न हों, लेकिन इसमें खुलासा हुआ कि राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2015 के अंत तक 14 रजिस्ट्रयां हुई हैं।
जिसमें किसी को भी निदेशालय की ओर से सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है। इस दौरान निदेशालय से सोलन जिला में महज पांच ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी हुए हैं। जिसमें शहर का कोई भी बिल्डर शामिल नहीं है। जो रजिस्ट्रयां हुई हैं, वह बीबीएन में हुई हैं।
सेल डीड निरस्त करने की मांग
बिल्डरों की ओर से पानी, बिजली, सेनिटेशन टेक्स की अदायगी नहीं करने के चलते सोलन नगर परिषद को भी इन बिल्डरों की ओर से भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बिल्डरों और अधिकारियों की मिलीभगत से यह कार्य पिछले काफी समय चल रहा है। हालांकि अनैतिक रूप से बनाए गए इन फ्लैट्स की सेल डीड को निरस्त करने की मांग भी उठने लगी है।
क्या है ऑक्यूपेशन प्रमाण पत्र
ऑक्यूपेशन प्रमाण पत्र टाउन एंड कंट्री टीसीपी विभाग की ओर से जारी किया जाता है। जिसमें तय किया जाता है कि अप्रूव नक्शे के मुताबिक ही अपार्टमेंट और फ्लैट्स का निर्माण हुआ है या नहीं। इसके बाद भवन मालिक को ब्लाक या अपार्टमेंट का कब्जा मिल जाता है। इसके बाद ही फ्लैट्स बेचे जा सकते हैं।
इसी प्रमाण पत्र के जरिये नगर परिषद और बिजली बोर्ड की ओर से बिजली, पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए एनओसी जारी किया जाता है। ऑक्यूपेशन प्रमाण पत्र के बिना नगर परिषद को सीवरेज लाइन बिछाने में भी दिक्कतें पेश आ रही हैं। इसी तरह पार्किंग, पार्क, सराय भवन के आसपास की जमीन पर लगातार अतिक्रमण किया जा रहा है, लेकिन राजस्व रिकार्ड उपलब्ध नहीं होने से इससे रोकना मुश्किल हो गया है।
नियमानुसार छानबीन एवं कार्रवाई करें : निदेशक
निदेशक नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग संदीप कुमार ने कहा कि विभाग ने दिशा निर्देश जारी किए थे कि प्रमोटर/ बिल्डर को अपार्टमेंट/ कॉलोनी निर्माण के लिए निदेशक नगर एवं ग्राम योजना विभाग की ओर से जारी किए गए कंप्लीशन और ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के बिना रजिस्ट्रेशन/ सेल डीड नहीं होगी(
लेकिन शिकायत है कि कुछ राजस्व अधिकारियों की ओर से अपार्टमेंट और कॉलोनी निर्माताओं की ओर से निर्मित फ्लैट की रजिस्ट्रेशन/सेल डीड बिना ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के जारी किए हैं। लिहाजा उपायुक्त सोलन से सिफारिश की गई है कि नियमानुसार छानबीन कर कार्रवाई करें और कार्रवाई से इस विभाग को भी अवगत करवाएं।