{"_id":"6703d90d645460238e05fc2d","slug":"ram-sita-and-lakshman-were-sent-into-exile-for-fourteen-years-solan-news-c-176-1-ssml1042-129966-2024-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Solan News: राम, सीता और लक्ष्मण को मिला चौदह वर्ष का वनवास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Solan News: राम, सीता और लक्ष्मण को मिला चौदह वर्ष का वनवास
विज्ञापन
धर्मपुर में रामलीला में राम-सीता का हुआ विवाह
लक्ष्मण-परशुराम संवाद का भी दिखाया गया दृश्य
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। रामलीला क्लब और हिंदू जागरण धर्मपुर की ओर से आयोजित लीला में सीता स्वयंवर और लक्ष्मण-परशुराम संवाद का मंचन किया। रामलीला के पहले दृश्य में जनक दरबार दिखाया गया। जहां पर सीता स्वयंवर के लिए कई राजकुमार आए थे। इसमें प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण भी पहुंचे थे। राजा जनक की शर्त थी कि जो शिव धनुष को उठाकर चिल्ला चढ़ाएगा उसके साथ सीता का विवाह होगा।
इस दौरान आए राजकुमारों ने एक-एक कर शिव धनुष को उठाने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी धनुष नहीं उठा सका। ऐसा होता देख राजा जनक को गुस्सा आ गया और उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर ऐसा कोई वीर नहीं है जो धनुष पर चिल्ला नहीं चढ़ा सकता। यह शब्द बोलते ही लक्ष्मण गुस्सा गए और कहा कि भाई राम अभी यहां बैठे है। इसलिए ऐसी बातें कहना गलत है। इसके बाद श्रीराम शिव धनुष पर माथा टेककर चिल्ला चढ़ाते हैं और पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठता है। इतने में परशुराम वहां पहुंचते हैं और शिव धनुष को देख अचंभित हो उठते हैं। इस दौरान लक्ष्मण और परशुराम संवाद का दृश्य भी दिखाया गया। परशुराम शांत होने के बाद वापस चले जाते हैं। भगवान राम और सीता को वरमाला पहनाते हैं और विवाह होता है। इसके बाद मंथरा-कैकेई के संवाद को दिखाया गया। साथ ही भगवान राम, सीता और लक्ष्मण को चौदह वर्ष का बनवास दिया गया। इस दौरान सोहन, रोशन, सैम, दीपक, चक्षु, शुभम, सतेंद्र, कृष्ण, विनोद राणा समेत अन्य ने विभिन्न किरदार निभाए।
विज्ञापन
लक्ष्मण-परशुराम संवाद का भी दिखाया गया दृश्य
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। रामलीला क्लब और हिंदू जागरण धर्मपुर की ओर से आयोजित लीला में सीता स्वयंवर और लक्ष्मण-परशुराम संवाद का मंचन किया। रामलीला के पहले दृश्य में जनक दरबार दिखाया गया। जहां पर सीता स्वयंवर के लिए कई राजकुमार आए थे। इसमें प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण भी पहुंचे थे। राजा जनक की शर्त थी कि जो शिव धनुष को उठाकर चिल्ला चढ़ाएगा उसके साथ सीता का विवाह होगा।
इस दौरान आए राजकुमारों ने एक-एक कर शिव धनुष को उठाने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी धनुष नहीं उठा सका। ऐसा होता देख राजा जनक को गुस्सा आ गया और उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर ऐसा कोई वीर नहीं है जो धनुष पर चिल्ला नहीं चढ़ा सकता। यह शब्द बोलते ही लक्ष्मण गुस्सा गए और कहा कि भाई राम अभी यहां बैठे है। इसलिए ऐसी बातें कहना गलत है। इसके बाद श्रीराम शिव धनुष पर माथा टेककर चिल्ला चढ़ाते हैं और पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठता है। इतने में परशुराम वहां पहुंचते हैं और शिव धनुष को देख अचंभित हो उठते हैं। इस दौरान लक्ष्मण और परशुराम संवाद का दृश्य भी दिखाया गया। परशुराम शांत होने के बाद वापस चले जाते हैं। भगवान राम और सीता को वरमाला पहनाते हैं और विवाह होता है। इसके बाद मंथरा-कैकेई के संवाद को दिखाया गया। साथ ही भगवान राम, सीता और लक्ष्मण को चौदह वर्ष का बनवास दिया गया। इस दौरान सोहन, रोशन, सैम, दीपक, चक्षु, शुभम, सतेंद्र, कृष्ण, विनोद राणा समेत अन्य ने विभिन्न किरदार निभाए।
विज्ञापन