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Solan News: मक्की के टंडों के दाम गिरे, किसानों को नहीं मिल रहे खरीदार
Sat, 24 Oct 2026 12:34 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sat, 24 Oct 2026 12:34 AM IST
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नालागढ़ के ढांग ऊपरली पंचायत में खेत में रखे मक्की के टंडे- स्रोत- ग्रामीण।
दाम लुढ़ककर आधे पर आए, बेहतर कीमत के इंतजार में किसानों के अरमानों पर फिरा पानी
एक महीना बीतने के बाद भी नहीं पहुंच रहा कोई ग्राहक, पशु चारे का अतिरिक्त स्टॉक पड़ रहा भारी
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। इस वर्ष क्षेत्र में मक्की की बंपर पैदावार हुई है, लेकिन यही किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल होने वाले मक्की के टंडों के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। दामों में भारी गिरावट के चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, खुले आसमान के नीचे पड़े टंडों के खराब होने की आशंका भी बढ़ गई है।
पिछले वर्ष जहां किसानों को टंडों के एक बंडल के 25 से 30 रुपये तक मिल रहे थे, वहीं इस वर्ष दाम गिरकर मात्र 10 से 12 रुपये प्रति बंडल रह गए हैं। शुरुआत में उचित दाम मिलने की उम्मीद में कई किसानों ने अपने टंडे नहीं बेचे, लेकिन अब एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बाजार में खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
नालागढ़ क्षेत्र में इस बार पिछले कई वर्षों के मुकाबले मक्की की फसल काफी अच्छी हुई है। जो किसान अतिरिक्त टंडे बेचकर अच्छी आमदनी कर लेते थे, वे इस बार खरीदार न मिलने से मायूस हैं। खेड़ा गांव के किसान अवतार सिंह, मझोली के सुच्चा सिंह और ढांग निहली के साद राम ने बताया कि इस बार लगभग हर किसान के पास मक्की की अच्छी पैदावार हुई है। पहले मक्की की कटाई के तुरंत बाद टंडों की मांग बढ़ जाती थी और खरीदार इन्हें हाथोंहाथ खरीद लेते थे, लेकिन इस बार एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी इन्हें खरीदने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है।
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इनसेट
हरी घास की उपलब्धता भी बनी बड़ी वजह
दभोटा गांव के किसान सुरमुख सिंह ने इस स्थिति के पीछे एक अन्य प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष लंबे समय तक अच्छी बारिश होने के कारण जंगलों और खेतों में पशुओं के लिए हरी घास की पर्याप्त उपलब्धता रही है। यही वजह है कि मक्की के टंडों की खरीद की ओर लोगों का ध्यान नहीं गया। इसके चलते किसानों के पास पशुचारे के रूप में इस्तेमाल होने वाले टंडों का अतिरिक्त स्टॉक बिना बिके पड़ा है।
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एक महीना बीतने के बाद भी नहीं पहुंच रहा कोई ग्राहक, पशु चारे का अतिरिक्त स्टॉक पड़ रहा भारी
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। इस वर्ष क्षेत्र में मक्की की बंपर पैदावार हुई है, लेकिन यही किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल होने वाले मक्की के टंडों के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। दामों में भारी गिरावट के चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, खुले आसमान के नीचे पड़े टंडों के खराब होने की आशंका भी बढ़ गई है।
पिछले वर्ष जहां किसानों को टंडों के एक बंडल के 25 से 30 रुपये तक मिल रहे थे, वहीं इस वर्ष दाम गिरकर मात्र 10 से 12 रुपये प्रति बंडल रह गए हैं। शुरुआत में उचित दाम मिलने की उम्मीद में कई किसानों ने अपने टंडे नहीं बेचे, लेकिन अब एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बाजार में खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
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नालागढ़ क्षेत्र में इस बार पिछले कई वर्षों के मुकाबले मक्की की फसल काफी अच्छी हुई है। जो किसान अतिरिक्त टंडे बेचकर अच्छी आमदनी कर लेते थे, वे इस बार खरीदार न मिलने से मायूस हैं। खेड़ा गांव के किसान अवतार सिंह, मझोली के सुच्चा सिंह और ढांग निहली के साद राम ने बताया कि इस बार लगभग हर किसान के पास मक्की की अच्छी पैदावार हुई है। पहले मक्की की कटाई के तुरंत बाद टंडों की मांग बढ़ जाती थी और खरीदार इन्हें हाथोंहाथ खरीद लेते थे, लेकिन इस बार एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी इन्हें खरीदने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है।
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हरी घास की उपलब्धता भी बनी बड़ी वजह
दभोटा गांव के किसान सुरमुख सिंह ने इस स्थिति के पीछे एक अन्य प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष लंबे समय तक अच्छी बारिश होने के कारण जंगलों और खेतों में पशुओं के लिए हरी घास की पर्याप्त उपलब्धता रही है। यही वजह है कि मक्की के टंडों की खरीद की ओर लोगों का ध्यान नहीं गया। इसके चलते किसानों के पास पशुचारे के रूप में इस्तेमाल होने वाले टंडों का अतिरिक्त स्टॉक बिना बिके पड़ा है।