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उर्दू सेंटर सोलन में ट्रेनिंग लो नौकरी पाओ
ब्यूरो, सोलन
Updated Mon, 13 Jun 2016 11:28 PM IST
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राजस्व के पुराने अभिलेख की जानकारी सर्वसुलभ बनाने के उद्देश्य से सोमवार को सोलन में ग्रामीण राजस्व अधिकारियों तथा उर्दू के छात्रों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आरंभ किया गया।
- फोटो : demo pic
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राजस्व के पुराने अभिलेख की जानकारी सर्वसुलभ बनाने के उद्देश्य से सोमवार को सोलन में ग्रामीण राजस्व अधिकारियों तथा उर्दू के छात्रों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आरंभ किया गया। शिविर का शुभारंभ सोलन के उपायुक्त राकेश कंवर ने किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन का प्रयास रहेगा कि इस शिविर से लाभान्वित व्यक्तियों की उपायुक्त कार्यालय के ई-गवर्नेंस शाखा में सेवाएं ली जाएं। इसके एवज में मानदेय दिया जाएगा। कहा कि आय का साधन होने से उर्दू विषय में लोगों की रुचि बढ़ेगी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्रामीण राजस्व अधिकारियों के साथ उर्दू भाषा का ज्ञान प्राप्त कर रहे कुछ छात्रों को भी सम्मिलित किया है। यह छात्र जहां प्रशासन के लिए लाभदायक सिद्ध होंगे, वहीं अन्य को उर्दू की जानकारी भी प्रदान कर सकेंगे।
डीसी ने कहा कि यह हिमाचल का ऐसा पहला शिविर है जिसमें ग्रामीण राजस्व अधिकारियों को उर्दू भाषा का ज्ञान प्रदान किया जाएगा। 42 दिवसीय इस प्रशिक्षण शिविर से राजस्व विभाग के क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों को राजस्व के पुराने अभिलेख समझने और जनहित में इन्हें सर्वसुलभ बनाने में मदद मिलेगी। डीसी राकेश कंवर ने इस अवसर पर कहा कि मुगल काल से देश में मुख्य रूप से उर्दू भाषा में ही कार्य किया जाता रहा है। अंग्रेजों के आने के बाद ही राजस्व संबंधित कार्य उर्दू में ही किया जाता रहा। राजस्व के पुराने अभिलेख उर्दू में ही प्राप्त होते हैं। कहा कि उर्दू भाषा की सही जानकारी के अभाव में राजस्व के पुराने लंबित मामलों का निपटारा करना कठिन है। ऐसे में उर्दू के जानकार न मिलने की स्थिति में राजस्व के पुराने अभिलेख समझने मुश्किल होते हैं। कहा कि ग्रामीण राजस्व अधिकारियों को उर्दू का प्रशिक्षण प्रदान करने से जहां वे अपने स्तर पर ही राजस्व के पुराने अभिलेखों को समझ पाएंगे वहीं इससे समय और धन की बचत भी होगी।
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कम स्कूलों में पढ़ाया जा रहा उर्दू
डीसी ने कहा कि वर्तमान में बहुत कम स्कूलों में उर्दू एक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है जबकि इसके प्रचार प्रसार की विशेष आवश्यकता है। कहा कि प्रशासन का प्रयास रहेगा कि इस संस्थान में जिला से आगे बढ़ते हुए राज्य के विभिन्न जिलों से भी प्रशिक्षुओं को शामिल किया जाए। उन्होंने प्रशिक्षुओं से आग्रह किया कि वे तन्मयता के साथ उर्दू भाषा सीखें ताकि राजस्व अभिलेख समझने के साथ एक नई भाषा का ज्ञान भी प्राप्त कर सकें।
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संस्थान में 150 अध्यापक किए तैयार
संस्थान के प्रधानाचार्य प्रो. योगराज ने मुख्यातिथि का स्वागत करते हुए कहा कि इस संस्थान में उर्दू में स्नातकोत्तर की शिक्षा दी जाती है। संस्थान द्वारा 150 के लगभग उर्दू अध्यापकों को तैयार किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण के लिए जम्मू से विषय विशेषज्ञ हरबंस लाल, कमल सिंह तथा गुलाब रसूल को आमंत्रित किया है। प्रशिक्षण में 13 प्रशिक्षु भाग ले रहे हैं। इनमें राजस्व विभाग के ग्रामीण राजस्व अधिकारी भी शामिल हैं। इस अवसर पर अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी संदीप नेगी तथा जिला राजस्व अधिकारी अरुण शर्मा मौजूद रहे।