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Solan News: श्रीमद्भागवत कथा पुराण में मनाया कृष्ण जन्मोत्सव
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माखन मिश्री का लगाया भोग, श्रोताओं में भी बांटा
तालाब मंदिर कुनिहार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। तालाब मंदिर कुनिहार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में श्री कृष्णा जन्मोत्सव मनाया गया। इसमें पूरा पंडाल झूम उठा। इस दौरान माखन मिश्री का भोग श्रीकृष्ण को लगाया और श्रोताओं में बांटा। कथा वाचक हरिजी महाराज ने बताया द्वापर युग में भगवान विष्णु ने मां देवकी के गर्भ से जन्म लिया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण कंस के कारागार में जन्म लिया। उनके पिता वासुदेव ने उन्हें गोकुल में नंदबाबा और यशोदा के पास पालने के लिए छोड़ दिया। भगवान कृष्ण ने जन्म से ही अपनी दिव्य अलौकिक शक्तियों का दिखाना आरंभ कर दिया था। भगवान कृष्ण ने बाल रूप में गोकुल में बहुत सारी लीलाएं की।
कथावाचक ने आधुनिक युग में गंभीर चुनौतियां और समस्याओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने युवा शक्ति को संस्कार पूर्ण नैतिक शिक्षा देने का सभी अभिभावकों से आह्वान किया। कहा कि आज का मानव असीमित इच्छाओं के कारण इस भौतिकता वादी युग में बहुत आत्म केंद्रित हो गया है। वह देह से ही मानव प्रतीत होता है, परंतु विचार से दानव जैसे कृत्य करता है। उन्होंने जनसमुदाय से श्रीमद्भागवत में लिखी हुई शिक्षाओं को अपने व्यावहारिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
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तालाब मंदिर कुनिहार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। तालाब मंदिर कुनिहार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में श्री कृष्णा जन्मोत्सव मनाया गया। इसमें पूरा पंडाल झूम उठा। इस दौरान माखन मिश्री का भोग श्रीकृष्ण को लगाया और श्रोताओं में बांटा। कथा वाचक हरिजी महाराज ने बताया द्वापर युग में भगवान विष्णु ने मां देवकी के गर्भ से जन्म लिया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण कंस के कारागार में जन्म लिया। उनके पिता वासुदेव ने उन्हें गोकुल में नंदबाबा और यशोदा के पास पालने के लिए छोड़ दिया। भगवान कृष्ण ने जन्म से ही अपनी दिव्य अलौकिक शक्तियों का दिखाना आरंभ कर दिया था। भगवान कृष्ण ने बाल रूप में गोकुल में बहुत सारी लीलाएं की।
कथावाचक ने आधुनिक युग में गंभीर चुनौतियां और समस्याओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने युवा शक्ति को संस्कार पूर्ण नैतिक शिक्षा देने का सभी अभिभावकों से आह्वान किया। कहा कि आज का मानव असीमित इच्छाओं के कारण इस भौतिकता वादी युग में बहुत आत्म केंद्रित हो गया है। वह देह से ही मानव प्रतीत होता है, परंतु विचार से दानव जैसे कृत्य करता है। उन्होंने जनसमुदाय से श्रीमद्भागवत में लिखी हुई शिक्षाओं को अपने व्यावहारिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
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