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सोलन एमसी बना तो शहर में मर्ज होंगे ग्रामीण क्षेत्र, लगेगा टैक्स
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Thu, 21 Apr 2016 12:10 AM IST
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सोलन को नगर निगम बनाए जाने के बाद आसपास के क्षेत्रों के लोगों को टैक्स के दायरे में लाने का प्रस्ताव तैयार हो चुका है। रबौण, कथेड़, देहूंघाट और शामती के सैकड़ों लोगों की जेब पर सोलन को नगर निगम बनाने की कवायद महंगी पड़ेगी। इन क्षेत्रों से निगम अपने लिए आय के साधन सृजित करेगा। इसमें सीवरेज, पानी और संपत्ति से लेकर प्रापर्टी टैक्स सभी शामिल होंगे जो लोगों से वसूले जाएंगे।
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जरूरत पड़ने पर कुछ गांवों का नगर निगम में विलय किया जाएगा। हालांकि शहर के साथ लगते कुछ ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निगम में शामिल किए जाने का विरोध है। लेकिन निगम बनने के लिए पचास हजार की जनसंख्या की शर्त ग्रामीण क्षेत्र को विलय करके ही पूरी करेगा। कई क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां पर बाहरी क्षेत्रों के लोग आकर बसे हैं। इन क्षेत्रों में साफ सफाई, स्ट्रीट लाइट सड़कों की सुविधा सही नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में करीब 10 हजार हाउस होल्ड है।
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लगातार चौथी बार भेजा प्रस्ताव
सोलन को नगर निगम बनाने की कवायद वर्ष 2013 से शुरू है। 2013 में पहली बार नगर परिषद को नगर निगम बनाने का प्रस्ताव शहरी विकास विभाग के निर्देशानुसार प्रदेश सरकार को भेजा था। इस दौरान कुल राकेश पंत नप के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाल रहे थे।
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यह प्रस्ताव जनसंख्या की शर्त और लोगों के विरोध के चलते सिरे नहीं चढ़ पाया। इसके बाद वर्ष 2014 और 2015 में भी नप द्वारा नगर निगम बनने के संबंध में सरकार को जिला उपायुक्त के माध्यम से प्रस्ताव भेजे। वहीं 2016 में एक बार फिर शहरी विकास विभाग के निर्देशानुसार प्रस्ताव भेजा गया है।
यह है बाधा
रबौण, कथेड़, देहूंघाट और शामती पंचायत के सैकड़ों लोग नगर निगम में शामिल नहीं होना चाहते। लोगों का तर्क है कि इससे उन्हें पंचायत में रहते हुए मिलने वाली सभी सरकारी सुविधाएं और योजनाओं का फायदा नहीं मिलेगा। यही वजह है कि सोलन के नगर निगम बनने की कवायद में इतना लंबा समय लग रहा है। वहीं जनसंख्या का सही आंकड़ा न होने से तीन सालों से यह कवायद अधर में लटकी है।
इस बार यह होगा प्रयास
सोलन नगर निगम बनने की चौथी बार एक बार फिर उम्मीद जगी है। शहरी विकास निदेशालय ने सरकार के निर्देश पर नप सोलन से इसका नए से सिरे प्रारूप मांगा है। पिछली बार आंकड़ों की गफलत के चलते सोलन को नगर निगम का दर्जा नहीं मिल पाया था। नप अब निर्धारित पैरामीटर को सशक्त और बेहतर रूप से पेश करना चाहेगी।
इससे पहले नगर परिषद की तरफ से सरकार को भेजे प्रस्ताव को आबादी का आंकड़ा कम होने के चलते नकार देना भी एक कारण था। सरकार को नए सिरे से प्रस्ताव भेज दिया था लेकिन राजनीतिक उपेक्षा के चलते बात नहीं बनी।
50 हजार के फेर में जनसंख्या
नगर निगम बनाने के लिए शहरी आबादी 50 हजार से ऊपर होना जरूरी है। सोलन शहर के साथ लगते कस्बों को मिलाकर यह संख्या कहीं अधिक हो जाएगी। हालांकि नप के पास शहर की आबादी का सही आंकड़ा मौजूद नहीं है। मात्र अनुमानित आंकड़े ही प्रस्तुत किए जाते रहे हैं। इस कारण प्रस्ताव रिजेक्ट हुए हैं।
वर्ष 2011 में 39 हजार आबादी
2011 की जनगणना के मुताबिक शहर की आबादी 39 हजार थी लेकिन इसके बाद तेजी से शहरीकरण हुआ। इस दौरान अब तक शहर में सैकड़ों भवनों का निर्माण हो चुका है। इसी लिहाजा से आबादी में भी बढ़ोतरी हुई है। नप के दायरे में पेइंग गेस्ट का प्रचलन भी बड़ा है। 5 वर्षों में सोलन के इर्दगिर्द निजी यूनिवर्सिटी शिक्षण संस्थान भी खुले हैं। इसमें पढ़ने वाले स्टूडेंट सोलन शहर में ही रह रहे हैं। नप का दावा है कि इस समय शहर की जनगणना करवाए सोलन की आबादी 60 हजार से ऊपर पहुंच सकती है।
ध्यान में रखी जाएंगीसभी त्रुटियां : डीसी
डीसी राकेश कंवर ने कहा कि सरकार को नगर निगम का रिवाइज प्रारूप पहले भेजा जा चुका है। शहरी निदेशालय से अब तक इस प्रकार के नए निर्देश नहीं मिले हैं। निर्देशानुसार नगर निगम का प्रारूप फिर से सरकार को भेजा जाएगा। इसमें जनसंख्या और मर्ज क्षेत्रों के मामले ध्यान में रखे जाएंगे।
यह होगा लाभ
सोलन को नगर निगम बनाए जाने के बाद क्षेत्र के लोगों को सीवरेज और पानी जैसी कई मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। क्षेत्र के विकास को तरजीह देते हुए यहां पर पार्क और पार्किंग का निर्माण होगा। इसके अलावा क्षेत्र के सौंदर्यीकरण को लेकर निगम प्रशासन योजनाएं तैयार करेगा। क्षेत्र में बेतरतीब निर्माण को रोकने के लिए यहां पर निगम एक्ट को लागू किया जाएगा। नक्शे के मुताबिक निर्माण कार्य को सुनिश्चित किया जाएगा।