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सीआरआई प्रबंधन के खिलाफ कर्मचारियों का मोरचा
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Wed, 13 Apr 2016 10:48 PM IST
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केंद्रीय अनुसंधान केंद्र (सीआरआई) कसौली कर्मचारी संघ ने गेट मीटिंग के दौरान प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। आरोप है कि संस्थान के कुछ अफसर तानाशाह का रवैया अपना रहे हैं। इसके चलते कर्मचारियों की मांगे पूरी नहीं हो पा रही।
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धमकी दी कि अगर अफसरों ने अपना यह रवैया नहीं बदला तो उन्हें मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा। कर्मचारी संघ के आह्वान पर सभी विभागों के कर्मचारी विरोध स्वरूप 13 से 15 अप्रैल को संस्थान में काले बिल्ले लगाकर काम करेंगे। 16 से 19 अप्रैल तक लंच टाइम में नारेबाजी और धरना प्रदर्शन होगा। 21 से 23 अप्रैल तक दोपहर दो से तीन बजे तक कलम छोड़ हड़ताल होगी।
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25 अप्रैल को संस्थान के कर्मचारी पूरा दिन सामूहिक अवकाश करेंगे। संघ ने कहा की यदि इस पर भी संस्थान के प्रशासन ने अड़ियल रवैया नहीं छोड़ा तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा।
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कर्मचारी नेताओं का हल्ला बोल
संघ के महासचिव विजय शर्मा ने कहा कि संघ के पदाधिकारी कर्मचारियों द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि हैं। बावजूद इसके आला प्रबंधन कर्मचारियों की मांगों को लेकर संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक करने को तैयार नहीं। सह सचिव रमाकांत जैन ने कहा की संघ और कर्मचारी संस्थान के हित में कार्य करते हैं लेकिन संस्थान का प्रशासन माहौल बिगाड़ने पर लगा है। अंत में संघ के प्रधान मोहनलाल ने कहा कि प्रबंधन पूरी तरह तानाशाही और अड़ियल रवैया अपना रहे हैं। उन्होंने प्रशासन को चेताया की यदि कर्मचारी और संस्थान के हितों के साथ खिलवाड़ किया तो वो इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
इसलिए खफा है कर्मचारी संघ
पिछले साल 11 दिसंबर को निदेशक को कर्मचारी हितों को लेकर एक एजेंडा सौंपा था। इसके बाद चार जनवरी को निदेशक की संघ के साथ बैठक हुई थी। विरोधाभास होने से बैठक बीच में रुक गई थी। पुलिस की मध्यस्थता से 11 जनवरी को दोबारा बैठक का फैसला हुआ था। 23 जनवरी को बैठक हुई लेकिन मांगे इसके बाद भी पूरी नहीं की गई। इस वजह से अब कर्मचारी संघर्ष करने को मजबूर हैं।