फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   During Dussehra, the 'pot of sin' is shattered using a gun.

Solan News: बातल दशहरे में बंदूक से फोड़ा जाता है पाप का घड़ा

Mon, 19 Oct 2026 11:22 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 11:22 PM IST
विज्ञापन
राज परिवार निभाता है परंपरा
विज्ञापन

वर्ष 1908 से सरकारी दस्तावेजों में मिलता है मेले का उल्लेख, दूर-दूर से आते हैं लोग
हर होते हुए चार किलोमीटर जंगल के रास्ते बातल गांव पहुंचती है शोभायात्रा, ग्रामीण करते हैं भव्य स्वागत

योगेश शर्मा

अर्की (सोलन)। ऐतिहासिक बातल दशहरा करीब 600 वर्षों से मनाया जा रहा है। इस मेले में दूरदराज से लोग शामिल होते हैं। सरकारी दस्तावेजों में इस उत्सव का उल्लेख वर्ष 1908 से मिलता है। मेले में आज भी राजाओं के शासनकाल की परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। यहां दशहरे पर रावण दहन के साथ पाप के घड़े को बंदूक से निशाना लगाने की परंपरा भी निभाई जाती है।
अर्की बाजार में राजाओं के समय स्थापित भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर से ठाकुर जी की पालकी सजाकर शोभायात्रा निकाली जाती है। यह यात्रा अर्की बाजार से गाहर होते हुए करीब चार किलोमीटर जंगल के रास्ते बातल पहुंचती है। गांव पहुंचने पर लोग पालकी का भव्य करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद दशहरे की परंपराएं निभाई जाती हैं।
विज्ञापन

पंचायत प्रधान उर्मिला शर्मा ने बताया कि राजाओं के शासनकाल में रावण दहन नहीं होता था। उस समय राजा बंदूक से घड़े को निशाना बनाकर फोड़ते थे। इस घड़े को पाप का घड़ा माना जाता था और इसे फोड़ना असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक था। आज भी राज परिवार की ओर से घड़े पर निशाना लगाने की परंपरा निभाई जाती है। इसके बाद अन्य लोग भी बंदूक से निशाना लगाते हैं और अंत में रावण के पुतले का दहन किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

खेलों के साथ सजती हैं सांस्कृतिक संध्याएं
दो दिवसीय बातल मेले में दिन के समय खेल प्रतियोगिताएं होती हैं, जबकि रात को सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन किया जाता है। इनमें स्थानीय और बाहरी राज्यों के कलाकार प्रस्तुतियां देते हैं। मेले की सांस्कृतिक संध्याओं में गजल गायक चंदन दास, अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन सहित कई चर्चित कलाकार प्रस्तुति दे चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायण की पुत्री और प्रसिद्ध नृत्यांगना शोभना नारायण भी यहां प्रस्तुति दे चुकी हैं। स्थानीय निवासी शांति स्वरूप ने बताया कि उनके अनुसार, क्षेत्र में रावण दहन की शुरुआत बातल से हुई थी। बाद में अन्य स्थानों पर भी परंपरा शुरू हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed