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Solan News: देवदत्त और सत्यवर्त के प्रसंग सुनाकर दिया धैर्य का संदेश
Fri, 07 Aug 2026 11:36 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Fri, 07 Aug 2026 11:36 PM IST
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धरमपुर में आयोजित श्रीमद देवी भागवत कथा के दौरान मौजूद कथावाचक व भक्तगण। संवाद
धर्मपुर के सनातन धर्म मंदिर में चल रही देवी भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर(सोलन)। श्रावण मास के अवसर पर धर्मपुर के सनातन धर्म मंदिर में नौ दिवसीय श्री देवी भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। शिव शक्ति महादेव ग्रुप की मातृ शक्ति द्वारा आयोजित इस कथा के चौथे दिन कथा वाचक आचार्य तरुण शर्मा ने प्रवचन दिए।
आचार्य शर्मा ने कहा कि कथा करने और सुनने का सौभाग्य भगवान ही प्रदान करते हैं। उन्होंने देवदत्त ब्राह्मण की कहानी सुनाई, जिन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया था। उन्हें मूर्ख पुत्र का आशीर्वाद मिला, जो बारह वर्ष तक जंगल में रहा। सत्य बोलने के कारण उसका नाम सत्यवर्त पड़ा। सत्यवर्त को किसी के प्राण बचाने के लिए झूठ बोलना पड़ा, जिसे आचार्य ने सत्य से भी ऊपर बताया। उन्होंने जीवन में धैर्य के महत्व पर जोर दिया। आचार्य ने कहा कि माता-पिता देवता के समान हैं।
आचार्य तरुण शर्मा ने बताया कि मूर्ख संतान परिवार को दुखी कर सकती है। उन्होंने मोह का त्याग करने और गलत विचारों को मन में आने से रोकने का संदेश दिया। आचार्य ने यह भी कहा कि हर किसी को खुश रखना या सबकी प्रशंसा पाना संभव नहीं है। उन्होंने अंत में कहा कि धर्म की रक्षा करने से ही धर्म हमारी रक्षा करता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर(सोलन)। श्रावण मास के अवसर पर धर्मपुर के सनातन धर्म मंदिर में नौ दिवसीय श्री देवी भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। शिव शक्ति महादेव ग्रुप की मातृ शक्ति द्वारा आयोजित इस कथा के चौथे दिन कथा वाचक आचार्य तरुण शर्मा ने प्रवचन दिए।
आचार्य शर्मा ने कहा कि कथा करने और सुनने का सौभाग्य भगवान ही प्रदान करते हैं। उन्होंने देवदत्त ब्राह्मण की कहानी सुनाई, जिन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया था। उन्हें मूर्ख पुत्र का आशीर्वाद मिला, जो बारह वर्ष तक जंगल में रहा। सत्य बोलने के कारण उसका नाम सत्यवर्त पड़ा। सत्यवर्त को किसी के प्राण बचाने के लिए झूठ बोलना पड़ा, जिसे आचार्य ने सत्य से भी ऊपर बताया। उन्होंने जीवन में धैर्य के महत्व पर जोर दिया। आचार्य ने कहा कि माता-पिता देवता के समान हैं।
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आचार्य तरुण शर्मा ने बताया कि मूर्ख संतान परिवार को दुखी कर सकती है। उन्होंने मोह का त्याग करने और गलत विचारों को मन में आने से रोकने का संदेश दिया। आचार्य ने यह भी कहा कि हर किसी को खुश रखना या सबकी प्रशंसा पाना संभव नहीं है। उन्होंने अंत में कहा कि धर्म की रक्षा करने से ही धर्म हमारी रक्षा करता है।
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