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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Pandava era tradition: In Himachal Sirmaur two brothers married with the same bride

पांडव कालीन प्रथा: हिमाचल में दो भाइयों ने एक दुल्हन के साथ लिए सात फेरे, फिर हुआ जोड़ीदार विवाह; तीनों राजी

Sun, 20 Jul 2025 05:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा जगत सिंह तोमर, शिलाई (सिरमौर)
जगत सिंह तोमर, शिलाई (सिरमौर) Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 20 Jul 2025 05:58 AM IST
सार

यहां बरसों बाद शादी की जोड़ीदार प्रथा फिर जिंदा हुई है। क्षेत्र के दो भाइयों ने एक दुल्हन के साथ एक ही मंडप में सात फेरे लिए। 

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Pandava era tradition: In Himachal Sirmaur two brothers married with the same bride
पत्नी के साथ दोनों भाई... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के गिरिपार का हाटी क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में है। यहां बरसों बाद शादी की जोड़ीदार प्रथा फिर जिंदा हुई है। क्षेत्र के दो भाइयों ने एक दुल्हन के साथ एक ही मंडप पर सात फेरे लिए। बीते दिनों दोनों भाइयों ने दुल्हन से पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाज के साथ शादी की। तीनों की रजामंदी से ऐसा हुआ है। शादी के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस पांडवकालीन परंपरा की आम लोगों में चर्चा हो रही है।

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हिमाचल के सिरमौर, किन्नौर और उत्तराखंड के जौनसार बावर जैसे क्षेत्रों में बहुपति प्रथा रही है। शिलाई गांव के दो भाइयों प्रदीप सिंह व कपिल ने क्षेत्र की युवती से जोड़ीदारी प्रथा के अनुसार विवाह किया। दोनों भाइयों ने एक दुल्हन के साथ सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में विवाह की रस्में निभाईं।
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एक भाई सरकारी कर्मचारी तो दूसरा विदेश में करता है काम
यह शादी हाटी समुदाय की जोड़ीदार परंपरा के अनुसार हुई, जिसमें एक पत्नी को दो या अधिक भाई साझा रूप से अपनाते हैं। प्रदीप और कपिल नेगी ने इस परंपरा से शादी का फैसला लिया, जिसे वे विश्वास, देखभाल और साझी जिम्मेदारी का रिश्ता मानते हैं। प्रदीप सरकारी कर्मचारी हैं, जबकि उनका छोटा भाई विदेश में काम करता है। दोनों भाइयों ने कहा कि आपसी सहमति से हमने विवाह करने का निर्णय लिया है। उसके बाद युवती ने भी इस विवाह के लिए सहमति दी।
 

दुल्हन बोलीं- नहीं कोई दबाव
दुल्हन का कहना है कि उसका स्वयं का निर्णय है, कोई दबाव नहीं था। शादी में सैकड़ों गांववाले और रिश्तेदार शामिल हुए और तीन दिन तक चले समारोह में पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। क्षेत्र के बुजुर्गों ध्यान सिंह, जालम सिंह, नैन सिंह, दिवडू राम ने बताया कि जोड़ीदारी प्रथा से शादी करने का कारण पुश्तैनी संपत्ति का विभाजन रोकना, महिलाओं को विधवा होने से बचाना और परिवार में एकता बनाए रखना था।
 

इस प्रथा के प्रचलन में महाभारत कालीन पांडव संस्कृति को मुख्य स्रोत के रूप में माना जाता है। पांडवों का अज्ञात वास सिरमौर जिला का गिरिपार क्षेत्र, उत्तराखंड का जौनसार बावर और शिमला जिला के जुब्बल क्षेत्र में भी रहा है जिसके अनेक प्रमाण आज भी उपलब्ध हैं। हाटी और जौनसार जनजाति के प्रमुख आराध्य देव जौनसार बावर के हनोल में स्थित महासू देवता के मंदिर की मूल स्थापना पांडवों की ओर से ही मानी जाती है। इन क्षेत्रों के मूल निवासी शाठी और पाशी अपने को कौरव और पांडव वंशज मानते हैं। -कुंदन सिंह शास्त्री, महासचिव केंद्रीय हाटी  समिति गिरिपार क्षेत्र

और भी कई तरह की शादियां हैं प्रचलन में
हिमाचल में अभी भी कई ऐसी शादियां है तो चर्चा का विषय बनी रहती हैं। किन्नौर में पीठ-चुक शादी का भी चलन रहा है। इसमें युवक अपनी पसंद की युवती को शादी के इरादे से पीठ पर उठाकर ले जाता है तो समाज उनके विवाह को मान्यता दे देता है। जिला शिमला के अपर महासूवी क्षेत्र में परैणा प्रथा से विवाह करने का चलन है। इसमें दूल्हा शादी करने दुल्हन के घर नहीं जाता। बल्कि दुल्हन खुद दूल्हे के घर आती है। हालांकि, दूल्हे की ओर से उसके रिश्तेदार प्रतिनिधि बनकर जाते हैं।
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