फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla: Alternative to chemicals in TB drug manufacturing; Ekta from HPU receives international recognition

शिमला: टीबी की दवा निर्माण में रसायनों का विकल्प, एचपीयू की एकता को अंतरराष्ट्रीय सम्मान

Wed, 21 Oct 2026 08:59 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 21 Oct 2026 08:59 PM IST
सार

जैव प्रौद्योगिकी विभाग में पीएचडी कर रही एकता ने फफूंद से प्राप्त एंजाइम की मदद से रिफामाइसिन बी को रिफामाइसिन एस में बदलने की प्रक्रिया विकसित की है। रिफामाइसिन एस कई अर्ध-संश्लेषित औषधियों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला मध्यवर्ती पदार्थ है। 

विज्ञापन
Shimla: Alternative to chemicals in TB drug manufacturing; Ekta from HPU receives international recognition
एचपीयू की शोधार्थी एकता आर्य को कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने किया सम्मानित। - फोटो : संवाद

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

टीबी की दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों को तैयार करने के लिए हानिकारक रसायनों का विकल्प खोजने की दिशा में एचपीयू के बायोटेक विभाग की शोधार्थी एकता आर्य ने महत्वपूर्ण शोध किया है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग में पीएचडी कर रही एकता ने फफूंद से प्राप्त एंजाइम की मदद से रिफामाइसिन बी को रिफामाइसिन एस में बदलने की प्रक्रिया विकसित की है। रिफामाइसिन एस कई अर्ध-संश्लेषित औषधियों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला मध्यवर्ती पदार्थ है। एकता ने चेन्नई में चिकित्सा, जनस्वास्थ्य और जीवन विज्ञान में नवाचारों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोध प्रस्तुत किया। शोध से संबंधित भारतीय पेटेंट भी प्रकाशित हुआ है।

विज्ञापन


विवि के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने एकता और उनके शोध निर्देशक को बधाई दी। एकता ने शोध निर्देशक प्रो. दुनी चंद और अमित कुमार के साथ मिलकर अल्बिफिम्ब्रिया वेरुकैरिया नामक फफूंद से प्राप्त रिफामाइसिन ऑक्सीडेज एंजाइम का इस्तेमाल किया। एंजाइम ऐसे जैविक पदार्थ होते हैं, जो रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेजी से होने में मदद करते हैं। इस प्रक्रिया में एंजाइम ने रिफामाइसिन बी को रिफामाइसिन एस में बदलने का काम किया। पारंपरिक रासायनिक विधि के मुकाबले इस जैविक तरीके को अपनाने का उद्देश्य दवा निर्माण में हानिकारक पदार्थों के इस्तेमाल और उत्पादन को कम करने की संभावनाएं तलाशना है।

विज्ञापन
Trending Videos

15 मिनट में तैयार हुआ 1.92 मिलीमोल उत्पाद
शोधार्थियों ने एंजाइम की मात्रा, तापमान और प्रतिक्रिया की परिस्थितियों में बदलाव कर प्रक्रिया को बेहतर बनाया। शोध के अनुसार 45 डिग्री सेल्सियस तापमान और 200 चक्कर प्रति मिनट की गति पर मुक्त एंजाइम ने दो मिलीमोल रिफामाइसिन बी से 15 मिनट में 1.92 मिलीमोल रिफामाइसिन एस तैयार किया। अगर जेल में स्थिर किए गए एंजाइम से 30 मिनट में 1.76 मिलीमोल उत्पाद प्राप्त हुआ। प्रक्रिया का परीक्षण एक लीटर स्तर पर भी किया गया। उत्पाद की मात्रा का विश्लेषण उच्च प्रदर्शन द्रव क्रोमैटोग्राफी तकनीक से किया गया।

विज्ञापन

दवा निर्माण में घटेगा प्रदूषण और लागत
पारंपरिक रासायनिक विधियों में हानिकारक पदार्थों का उत्पादन, कम उपज और अधिक लागत जैसी चुनौतियां हो सकती हैं। एंजाइम आधारित प्रक्रिया इन समस्याओं को कम करने का विकल्प है। यह विधि औद्योगिक स्तर पर सफल रहती है तो दवा निर्माण में पर्यावरणीय नुकसान कम करने और उत्पादन लागत घटाने में मदद मिल सकती है। इस अध्ययन में फफूंद से प्राप्त रिफामाइसिन ऑक्सीडेज एंजाइम का इस्तेमाल रिफामाइसिन बी को रिफामाइसिन एस में बदलने के लिए किया गया। शोधार्थियों ने मुक्त एंजाइम और अगर जेल में स्थिर किए गए एंजाइम की कार्यक्षमता का अध्ययन किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed