Sanjauli Mosque: मस्जिद विवाद के बाद संजौली में अब माहौल शांत, कारोबारी बोले-खत्म होना चाहिए यह विवाद
संजौली में मस्जिद विवाद के बाद अब पुलिस ने यहां तैनात जवानों की संख्या बहुत कम कर दी है। अब यहां माहौल सामान्य होने लगा है। पूरे मामले को लेकर जब दोनों समुदायों के कारोबारियों से बात की गई तो सबका यही कहना था कि अब यह विवाद खत्म होना चाहिए।
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संजौली मस्जिद में कथित अवैध निर्माण को पैदा हुए तनाव के एक माह बाद अब माहौल सामान्य होने लगा है। पुलिस ने यहां तैनात जवानों की संख्या भी बहुत कम कर दी है। पहले जहां सौ के करीब पुलिस जवान यहां तैनात थे वहीं अब तीन-चार पुलिस ही कर्मी हैं। संजौली बाजार में 11 सितंबर को प्रदर्शन के बाद से माहौल तनावपूर्ण बना हुआ था। पूरे मामले को लेकर जब दोनों समुदायों के कारोबारियों से बात की गई तो सबका यही कहना था कि अब यह विवाद खत्म होना चाहिए।
मुस्लिम समुदाय के कारोबारियों के चेहरों पर पूरे विवाद को लेकर चिंता साफ नजर आ रही थी। संजौली में सब्जी और फलों की दुकान चलाने वाले आजम ने बताया कि उनका परिवार वर्ष 1967 से संजौली में रह रहा है। सहारनपुर के एक कारोबारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि वह आठ सालों से यहा दुकान चला रहे हैं। कहा कि बेशक पूरे मामले को लेकर विवाद चल रहा है, लेकिन स्थानीय लोग उनके साथ हैं। संजौली चौक के पास ही दुकान चलाने वाले आशीष कुमार ने बताया कि सभी लोगों को अपनी रोजी-रोटी की चिंता है, पूरे मामले को लेकर आम लोगों को ज्यादा सरोकार नहीं है। बाजार में सब्जी की दुकान चलाने वाले रवि कुमार ने कहा कि इस विवाद से दोनों समुदाय के लोगों को बांटने का प्रयास किया जा रहा है। क्षेत्र में सभी धर्मों के लोग रहते हैं और सौहार्दपूर्ण माहौल के लिए सभी को मिलजुलकर रहने की जरूरत है।
मस्जिद जाने वाले मुख्य रास्ते से हटाए बैरिकेड
संजौली में 11 सितंबर को हुए उग्र प्रदर्शन के बाद लगातार एक महीने से मस्जिद जाने वाले सभी मार्गों पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा है। इस दौरान बिना पूछताछ के किसी को भी जाने की अनुमति नहीं थी लेकिन शनिवार को संजौली बाजार में पुलिस काफी कम संख्या में नजर आई। वहीं मस्जिद जाने वाले मुख्य मार्ग से भी बैरिकेड भी हटाए दिए हैं। हालांकि दो मार्गों पर बैरिकेड अभी लगा रखे हैं। इनमें से एक मार्ग पर एक पुलिस कर्मी तैनात था। इसके अलावा मस्जिद के बाहर तीन से चार पुलिस कर्मचारी तैनात हैं। मस्जिद के सामने से गुजरने वाले रास्ते से भी लोगों को बेरोकटोक जाने दिया जा रहा था।