Renuka Singh Thakur: एक सप्ताह बाद घर आएंगी रेणुका, पहले हाटकोटी मंदिर में माथा टेकेंगी; गांव में धाम का आयोजन
विश्वकप विजेता टीम की सदस्य रेणुका ठाकुर घर आने से पहले हाटकोटी मंदिर में माथा टेकेंगी। सोमवार को रेणुका के घर पर धाम का आयोजन किया गया। पढ़ें पूरी खबर...
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विश्वकप विजेता टीम की सदस्य रेणुका सिंह ठाकुर का घर पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया जाएगा। रेणुका घर आने से पहले हाटकोटी मंदिर में माथा टेकेंगी। रेणुका के घर में स्वागत की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इधर, पूरा परिवार मैच जीतने के बाद रात भर नहीं सोया और जश्न का दौर जारी रहा। सोमवार को रेणुका के घर पर धाम का आयोजन किया गया। अमर उजाला से विशेष बातचीत में मां सुनिता ठाकुर ने बताया कि करीब एक सप्ताह बाद रेणुका का गांव लौटने का कार्यक्रम है। अभी वह मुंबई में आराम कर रही हैं। उससे बातचीत का समय नहीं मिला। हर रिश्तेदार उससे फोन पर बात करने के लिए उत्साहित है।
सुनिता ने बताया जब बेटी 12 साल की उम्र में गांव के छोटे से मैदान में खेल रही थी तो उसके चाचा ने प्रतिभा को पहचाना । उन्होंने ही उसका धर्मशाला क्रिकेट अकादमी तक पहुंचाने में सहयोग किया। बताया कि रेणुका के पिता स्व. केहर सिंह ठाकुर क्रिकेट देखने के बहुत शौकीन थे। जब कोई मैच होता था, तो अपने घर में टीवी नहीं होने पर दूसरों के घरों में बैठकर क्रिकेट का आनंद उठाते थे। कहते थे कि अपने बच्चों को भी क्रिकेटर बनाउंगा। आज वह जिंदा होते को उनको बहुत खुशी होती।
सुनिता ठाकुर ने बताया कि वैसे तो रेणुका जो घर पर बनता वही सादा खना ही पसंद करती हैं, लेकिन जिस दिन घर पहुंचेंगी उस दिन माश के बड़े, पुरी, सिड्डू सहित अन्य पारंपरिक पकवान उसके लिए तैयार करेंगी। उसके स्वागत में गांव में धाम भी बनवाई जाएगी।
सुनिता ठाकुर ने कहा माता-पिता हमेशा बच्चों के लिए आखरी सांस तक संघर्ष करते हैं। माता-पिता को बच्चों को मुकाम तक पहुंचाने के लिए बंधन में नहीं रखना चाहिए। हमारे समाज में बेटियों पर कुछ बंदिश रहती हैं। बच्चों को भी नशे से दूर रहकर कड़ी मेहनत कर अपना फर्ज निभाना चाहिए।
विश्व कप जीतने के बाद भारतीय टीम की मुख्य तेज गेंदबाज रेणुका ठाकुर के गांव पारसा में जश्न का माहौल है। लोग सुबह से घर पहुंचकर परिजनों को बधाई दे रहे हैं, वहीं रिश्तेदार भी बधाई देने पहुंच रहे हैं। पूरा दिन गांव के लोग डीजे पर खूब झूमें। घर के आंगन में बाहर से आए मेहमानों और ग्रामीणों के लिए पार्टी का आयोजन किया गया। पूरे गांव के लिए रेणुका के घर पर दोपहर भोजन का आयोजन किया गया। फाइनल जीतने के बाद से जश्न की तैयारियां शुरू हो गई थीं। पूर्वाहन 11:00 बजे से घर के आंगन में डीजे पर नाटियों का दौर शुरू हो गया। देर शाम तक घर पर जश्न चलता रहा।