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रेगुलर डिग्री कोर्स के साथ भत्ता नहीं
अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 29 Dec 2013 01:03 PM IST
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हिमाचल में रेगुलर डिग्री कोर्स के साथ साथ कोई अन्य स्किल ट्रेनिंग करने पर कौशल विकास भत्ता नहीं मिलेगा।
इस तरह के आवेदन पहुंचने पर सरकार ने यह फैसला लिया। इसी के अनुसार योजना के दिशा निर्देशों में भी बदलाव होगा।
उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि इस बारे में श्रम विभाग गाइड लाइंस में संशोधन कर रहा है।
कौशल विकास भत्ते के लिए बीए, बीएससी, बीकाम, बीटेक, बीई, एमबीबीएस, बीएएमएस, बीडीएस, बीबीए, एमबीए, एमटीए, सीए-सीएस, एमए, एमएससी, एमकाम, एमफिल, पीएचडी से लेकर जेबीटी, ड्राइंग टीचर और बीएड जैसे कोर्स पहले ही मान्य नहीं हैं।
लेकिन बहुत से युवा इन कोर्सों में पढ़ाई के दौरान कंप्यूटर या अन्य ट्रेनिंग कोर्सों में एडमिशन लेकर भत्ते के लिए आवेदन कर रहे थे।
श्रम विभाग ने इस मसले पर सरकार से राय मांगी थी। इसके बाद यह तय हुआ कि रेगुलर कोर्स के साथ भत्ता नहीं दिया जा सकता।
उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि मंडी, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों के कुछ क्षेत्रों से शिकायतें थीं कि कुछ निजी संस्थान यह भत्ता दिलाने या इसके कोर्स करवाने के लिए 300-300 रुपये युवाओं से वसूल रहे हैं।
इन शिकायतों पर जांच के आदेश श्रमायुक्त को दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार कार्रवाई करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि किसी भी एजेंसी या संस्थान को भत्ते के लिए काम पर नहीं लगाया गया है।
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16 हजार को दिया 2 करोड़ भत्ता
श्रम विभाग अब तक राज्य में करीब 16500 युवाओं को 2 करोड़ रुपये से अधिक का भत्ता बांट चुका है।
इनमें सबसे ज्यादा 3293 युवा सिरमौर, 3222 कांगड़ा और 3070 युवा मंडी में हैं। शिमला और चंबा में स्कीम का रिस्पांस ढीला है। यहां केवल 626 और 424 युवा ही अब तक यह लाभ ले पाए हैं।
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इस तरह के आवेदन पहुंचने पर सरकार ने यह फैसला लिया। इसी के अनुसार योजना के दिशा निर्देशों में भी बदलाव होगा।
उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि इस बारे में श्रम विभाग गाइड लाइंस में संशोधन कर रहा है।
कौशल विकास भत्ते के लिए बीए, बीएससी, बीकाम, बीटेक, बीई, एमबीबीएस, बीएएमएस, बीडीएस, बीबीए, एमबीए, एमटीए, सीए-सीएस, एमए, एमएससी, एमकाम, एमफिल, पीएचडी से लेकर जेबीटी, ड्राइंग टीचर और बीएड जैसे कोर्स पहले ही मान्य नहीं हैं।
लेकिन बहुत से युवा इन कोर्सों में पढ़ाई के दौरान कंप्यूटर या अन्य ट्रेनिंग कोर्सों में एडमिशन लेकर भत्ते के लिए आवेदन कर रहे थे।
श्रम विभाग ने इस मसले पर सरकार से राय मांगी थी। इसके बाद यह तय हुआ कि रेगुलर कोर्स के साथ भत्ता नहीं दिया जा सकता।
उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि मंडी, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों के कुछ क्षेत्रों से शिकायतें थीं कि कुछ निजी संस्थान यह भत्ता दिलाने या इसके कोर्स करवाने के लिए 300-300 रुपये युवाओं से वसूल रहे हैं।
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इन शिकायतों पर जांच के आदेश श्रमायुक्त को दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार कार्रवाई करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि किसी भी एजेंसी या संस्थान को भत्ते के लिए काम पर नहीं लगाया गया है।
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16 हजार को दिया 2 करोड़ भत्ता
श्रम विभाग अब तक राज्य में करीब 16500 युवाओं को 2 करोड़ रुपये से अधिक का भत्ता बांट चुका है।
इनमें सबसे ज्यादा 3293 युवा सिरमौर, 3222 कांगड़ा और 3070 युवा मंडी में हैं। शिमला और चंबा में स्कीम का रिस्पांस ढीला है। यहां केवल 626 और 424 युवा ही अब तक यह लाभ ले पाए हैं।