New GST Rates : नए जीएसटी से बुनकर उद्योग को बूस्टर डोज, सस्ते हुए उत्पाद; कारोबारी और ग्राहक दोनों खुश
हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में करीब 12,000 से अधिक परिवार बुनकर उद्योग से जुड़े हैं। भारत सरकार की ओर से जीएसटी स्लैब में किए बदलाव इन्हें फायदा हुआ है। जीएसटी कम होने से बुनकर से जुड़े कारोबारी और ग्राहक दोनों खुश हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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नई जीएसटी दरें सोमवार से लागू हो गई हैं। इससे कुल्लू के बुनकर उद्योग को बूस्टर डोज मिला है। खासकर शॉल, टोपी, जुराबें और अन्य ऊनी वस्त्र सस्ते हो गए। कुल्लू में करीब 12,000 से अधिक परिवार बुनकर उद्योग से जुड़े हैं। भारत सरकार की ओर से जीएसटी स्लैब में किए बदलाव से 2,500 रुपये तक के उत्पादों पर अब पांच फीसदी जीएसटी लगेगा। पहले इस पर 12 फीसदी जीएसटी था। ग्राहकों को अब 2,000 रुपये के ऊनी वस्त्रों में 70 रुपये और 2,500 पर 105 रुपये की बचत हुई है।
कुल्लू में बुनकर उद्योग का कारोबार करोड़ों का है। जीएसटी कम होने से बुनकर से जुड़े कारोबारी और ग्राहक दोनों खुश हैं। उत्पादों के सस्ता होने से बुनकर उद्योग में और भी गति आने की उम्म्मीद है। जिले में तैयार होने वाले कुल्लवी शॉल, टोपी, मफलर, स्टॉल और ऊनी जैकेट, जिनकी कीमत 2,500 रुपये से नीचे है, ये सस्ते हो गए हैं। जबकि इससे अधिक महंगे उत्पादों पर 18 फीसदी जीएसटी है। कुल्लवी शॉल, टोपी, मफलर, स्टॉल और ऊनी जैकेट को सबसे अधिक मध्यम वर्ग के लोग खरीदते हैं।
जिले में करीब 400 के करीब बुनकर लघु उद्योग हैं। जबकि कई लोग ऐसे हैं जो घर में खड्डी (बुनकर उपकरण) लगाकर शॉल, टोपी, मफलर, जुराबें, स्टॉल को तैयार कर रोजगार कमा रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या भी हजारों में है। विश्व प्रसिद्ध भुट्टिको के सलाहकार रमेश ठाकुर ने कहा कि 2,500 से कम कीमत वाले उत्पाद सस्ते हो गए है। भुट्टिको संस्थान में करीब 1,200 लोगों को रोजगार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि 12 से पांच प्रतिशत जीएसटी दर रहने से मध्यम वर्ग को फायदा होगा। 2500 रुपये तक की खरीदारी पर 105 रुपये की बचत होगी।