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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Nerchowk Medical College Five trainee doctors suspended for three months for making false complaint of ragging

Himachal News: रैगिंग की झूठी शिकायत करने पर पांच प्रशिक्षु डॉक्टर तीन माह के लिए सस्पेंड, जानें पूरा मामला

Wed, 23 Jul 2025 10:21 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, नेरचौक (मंडी)।
संवाद न्यूज एजेंसी, नेरचौक (मंडी)। Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 23 Jul 2025 10:21 PM IST
सार

श्री लाल बहादुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नेरचौक के पांच प्रशिक्षु डॉक्टरों को तीन माह के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। वजह है झूठी शिकायत। जानें पूरा मामला...

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Nerchowk Medical College Five trainee doctors suspended for three months for making false complaint of ragging
श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक - फोटो : संवाद

विस्तार

श्री लाल बहादुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नेरचौक में रैगिंग की झूठी शिकायत करने पर पांच प्रशिक्षु डॉक्टरों पर गाज की गिरी है। संस्थान की एंटी रैगिंग कमेटी ने इसका कड़ा संज्ञान लेते हुए प्रशिक्षु डॉक्टरों को तीन माह के लिए सस्पेंड करने की सिफारिश की। प्रशिक्षुओं को सस्पेंड करने सहित 25-25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। पांच जुलाई को पांच प्रशिक्षु डॉक्टरों ने सीनियर पर वर्ष 2023 में उनके साथ रैगिंग करने का आरोप लगाया था। मामले में सात जुलाई को एंटी रैगिंग कमेटी की पहली बैठक हुई। इसमें 18 में से 10 सदस्य शामिल हुए। इसमें एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाई और निर्णय लिया गया कि कमेटी जांच पड़ताल करेगी।

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18 जुलाई को दूसरी बैठक हुई। आंतरिक जांच पड़ताल में 90 लोगों से बातचीत की और तथ्य जुटाए गए। शिकायतकर्ता अपनी तरफ से शिकायत बारे सबूत पेश नहीं कर पाए। उनकी ओर से पेश किए गए तथ्य झूठे पाए गए और जांच में पुख्ता नहीं निकले। कमेटी ने पाया कि शिकायतकर्ता व दूसरे पक्ष का आपसी झगड़ा हुआ था और मामला पुलिस तक पहुंचा था। इसी को दबाने के लिए ही रैगिंग का ड्रामा रचा गया था।

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हैरानीजनक यह रहा कि शिकायतकर्ता पक्ष का कोई भी तथ्य सही नहीं पाया गया। जांच में यह भी सवाल खड़ा किया गया कि आखिर दो साल तीन महीने तक इस मामले की जानकारी प्रबंधन को क्यों नहीं दी गई। एक्ट के प्रावधानों के अनुसार रैगिंग की झूठी शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई की गई।

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सूत्र बताते हैं कि 2023 में सीनियर प्रशिक्षु ने जूनियर प्रशिक्षु के नाम लाइब्रेरी से किताबें ली थीं। इसकी एवज में फीस नहीं दी और जूनियर पर जुर्माना लगता रहा। जूनियर एकत्रित होकर सीनियर के पास चले गए और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। मामला पुलिस तक भी पहुंचा। इसी मामले को दबाने के लिए रैगिंग का खेल खेला गया, लेकिन जांच में यह सिरे नहीं चढ़ पाया और उल्टा शिकायतकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई अमल पर लाई गई। उधर, नेरचौक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डीके वर्मा ने बताया कि नियमानुसार मामले में कार्रवाई अमल पर लाई गई है।

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