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पहले मौसम की मार अब अज्ञात बीमारी के चपेट में सेब के बगीचे
Fri, 30 Apr 2021 10:58 AM IST
अरविन्द ठाकुर
प्रीतम शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, गुशैणी (कुल्लू)
प्रीतम शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, गुशैणी (कुल्लू)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 30 Apr 2021 10:58 AM IST
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सेब के बगीचे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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मौसम की मार के बाद अब सेब के बगीचे अज्ञात बीमारी की चपेट में आ गए हैं। तीर्थन घाटी में सेब के पेड़ों के आधे भाग में पत्तियां नहीं आ रही हैं। कई टहनियों में पत्ते न आने से बागवानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। कोरोना के बीच बागवानों को इस बार अच्छी फसल की उम्मीद थी, लेकिन पहले मौसम और अब बीमारी ने इस उम्मीद को झटका दिया है।
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बागवान चमन लाल, सुंदर सिंह, रूप लाल, केशव शर्मा, सूरत राम, उदय शर्मा, शेर सिंह ठाकुर ने कहा कि सेब के पेड़ों में पत्ते न आना सेब के बगीचों में एक नई किस्म की बीमारी है। सेब पेड़ों की कुछ टहनियों पर पत्तों के साथ फल भी लग गए हैं। जबकि कुछ टहनियां पर पत्ते नहीं आ पाए हैं।
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ऐसे में इन टहनियों के साथ पेड़ के सूख जाने का डर सताने लगा है। यह बीमारी कैंकर रोग से बिल्कुल अलग है। कैंकर में पौधों की छाल पर बीमारी साफ तौर नजर आती है लेकिन इसमें छाल बिल्कुल सही है। न ही बीमारी नजर भी नहीं आ रही है। बीमारी का प्रकोप तीर्थन घाटी सहित कई अन्य जगहों पर भी देखने को मिल रहा है।
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इधर, बागवानी विभाग के एसएमएस डॉ. रामनाथ ठाकुर ने कहा कि पौधों में पोषक तत्व की कमी के कारण इस प्रकार के लक्षण सामने आते हैं। इसके उपचार के लिए माइक्रो न्यू ट्रेंड और ह्यूमस एसिड का छिड़काव करें। इससे बीमारी पर नियंत्रण किया जा सकता है। बागवान बगीचों की मिट्टी की जांच भी करवाएं।