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Kullu News: ढाई हजार दावे लंबित, वन भूमि का हक अब तक सिर्फ एक को

Thu, 15 Oct 2026 10:28 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Thu, 15 Oct 2026 10:28 AM IST
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Two and a half thousand claims are pending, so far only one has the right to forest land
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी में वन अधिकार अधिनियम के तहत वन भूमि पर मालिकाना हक पाने के लिए किए गए करीब ढाई हजार दावे लंबे समय से लंबित हैं।
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केलांग और उदयपुर उपमंडल में ग्राम स्तर से लेकर उपमंडल और जिला स्तर तक आवेदन अटके हुए हैं। हैरानी की बात है कि अब तक दोनों उपमंडलों में केवल एक व्यक्ति को ही जमीन का अधिकार पत्र मिलने की जानकारी सामने आई है। अन्य दावेदार अपने दावों के निपटारे का इंतजार कर रहे हैं।
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वन अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित पात्रता और शर्तों के अनुसार 13 दिसंबर 2005 से पहले वन भूमि पर काबिज पात्र वनवासियों को अधिकार देने का प्रावधान है। इसके लिए दावेदारों को कब्जे के समर्थन में निर्धारित साक्ष्य प्रस्तुत करने होते हैं।
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इनमें गांव के बुजुर्गों की गवाही, पुराने राजस्व रिकॉर्ड और अन्य मान्य दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। हालांकि, लाहौल घाटी में पुराने कब्जे को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य जुटाना चुनौती बना हुआ है।
वन अधिकार अधिनियम को लेकर लंबे समय से जागरूकता शिविर आयोजित कर रहे पूर्व जिला परिषद सदस्य कुंगा बौद्ध ने बताया कि केलांग और उदयपुर उपमंडल में अब तक केवल एक व्यक्ति को जमीन का अधिकार पत्र सौंपा गया है। अन्य किसी दावेदार को अधिकार पत्र नहीं मिला है।
बड़ी संख्या में लोगों ने दावे प्रस्तुत किए हैं लेकिन उनके निपटारे की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 से पहले के भूमि कब्जे को प्रमाणित करने के लिए सैटेलाइट तस्वीरों का सहारा लेने में भी दिक्कतें आ रही हैं। पुरानी तस्वीरों में जमीन पर कब्जे की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण दावों के सत्यापन में परेशानी हो रही है। इसके चलते आवेदन लंबे समय से लंबित हैं।
सरकार पर उठाए सवाल
पूर्व विधायक एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रवि ठाकुर ने वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी अपने दौरों के दौरान लोगों को जमीन के अधिकार पत्र दिलाने की बात करते हैं लेकिन लाहौल घाटी में जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। रवि ठाकुर ने कहा कि सरकार को अधिनियम के तहत पात्र लोगों के दावों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि वर्षों से जमीन पर निर्भर किसानों को उनके अधिकार मिल सकें।

चुनाव के बाद बनेंगे गैर सरकारी सदस्य
उपमंडलाधिकारी केलांग कुनिका एकर्स ने बताया कि दावों से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। इनकी स्वीकृति के लिए वन अधिकार समिति के गैर सरकारी सदस्य बनाए जाने थे लेकिन पंचायती राज चुनाव के चलते ऐसा नहीं हो पाया। अब चुनाव प्रक्रिया पूरी हो गई है। जल्द ही समिति के गैर सरकारी सदस्य बनाए जाएंगे, जिसके बाद दावों को स्वीकृति मिल सकेगी।
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