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Kullu News: एक ही रथ में विराजमान हैं छह महाशक्तियां
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कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में देव बड़ा छमाहूं के शिविर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। देवता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। देव बड़ा छमाहूं से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं और अनूठी देव परंपराएं कुल्लू की समृद्ध देव संस्कृति की पहचान हैं।
देवता के पुजारी धनेश गौतम और कारदार शेर सिंह ठाकुर ने बताया कि देव बड़ा छमाहूं को सृष्टि का रचयिता और पालनहार माना जाता है। मान्यता के अनुसार, देवता के एक ही रथ में छह महाशक्तियां विराजमान हैं। इनमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश, आदि अनंत, शक्ति और शेषनाग शामिल हैं। इन छह शक्तियों के एक ही देव स्वरूप में समाहित होने के कारण देवता को बड़ा छमाहूं के नाम से जाना जाता है।
उन्होंने बताया कि महाप्रलय के बाद जब दोबारा सृष्टि की रचना का समय आया तो इसके लिए विभिन्न दिव्य शक्तियों की आवश्यकता पड़ी। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने ब्रह्मा, महेश, आदि अनंत, शक्ति और शेषनाग की शक्तियों को अपने में समाहित कर देव श्री बड़ा छमाहूं का स्वरूप धारण किया और सृष्टि का पुनर्निर्माण किया। इसी कारण देवता को सृष्टि की रचना और पालन से जुड़ी छह महान शक्तियों का समाहित स्वरूप माना जाता है। कारदार ने बताया कि देव बड़ा छमाहूं की मान्यता केवल कुल्लू तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण सराज घाटी से लेकर मंडी के सकेत तक है।
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देवता के पुजारी धनेश गौतम और कारदार शेर सिंह ठाकुर ने बताया कि देव बड़ा छमाहूं को सृष्टि का रचयिता और पालनहार माना जाता है। मान्यता के अनुसार, देवता के एक ही रथ में छह महाशक्तियां विराजमान हैं। इनमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश, आदि अनंत, शक्ति और शेषनाग शामिल हैं। इन छह शक्तियों के एक ही देव स्वरूप में समाहित होने के कारण देवता को बड़ा छमाहूं के नाम से जाना जाता है।
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उन्होंने बताया कि महाप्रलय के बाद जब दोबारा सृष्टि की रचना का समय आया तो इसके लिए विभिन्न दिव्य शक्तियों की आवश्यकता पड़ी। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने ब्रह्मा, महेश, आदि अनंत, शक्ति और शेषनाग की शक्तियों को अपने में समाहित कर देव श्री बड़ा छमाहूं का स्वरूप धारण किया और सृष्टि का पुनर्निर्माण किया। इसी कारण देवता को सृष्टि की रचना और पालन से जुड़ी छह महान शक्तियों का समाहित स्वरूप माना जाता है। कारदार ने बताया कि देव बड़ा छमाहूं की मान्यता केवल कुल्लू तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण सराज घाटी से लेकर मंडी के सकेत तक है।
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