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Kullu News: कुल्लू दशहरे की कमाई से सजते है जिला में छह देव उत्सव

Fri, 16 Oct 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 11:55 PM IST
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Six festivals in the district are funded by the earnings from Kullu Dussehra.
दशहरा उत्सव की तैयारी में जुटे विभाग के कर्मी।-संवाद
मणिकर्ण, वशिष्ठ, हरिपुर और नग्गर के आयोजनों को मिलती है आर्थिक मदद
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देव उत्सवों के आयाेजन में मददगार बनती है दशहरे की 30 प्रतिशत आय

अजय कुमार
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा केवल देवी-देवताओं के महाकुंभ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे होने वाली आय से जिले के कई अन्य पारंपरिक उत्सवों का आयोजन भी किया जाता है। कुल्लू दशहरा समिति की ओर से विभिन्न देव स्थलों और मेलों के लिए करीब 30 प्रतिशत हिस्सा आर्थिक सहायता के रूप में उपलब्ध करवाया जाता है। इससे क्षेत्र की देव संस्कृति, लोक परंपराओं और धार्मिक आयोजनों को संबल मिलता है।
कुल्लू दशहरा समिति को करीब 10 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। इस आय में से वर्ष 2025 में 20,43,934 रुपये की राशि जिले के छह देव उत्सवों के आयोजन पर खर्च की गई थी। यह राशि विभिन्न धार्मिक आयोजनों और मेलों के लिए दी जाती है। इनमें मणिकर्ण दशहरा, वशिष्ठ दशहरा, हरिपुर का दशहरा मेला, नग्गर का मिनी दशहरा और बूढ़ी दिवाली जैसे आयोजन शामिल हैं।
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मणिकर्ण में पांच दिन तक दशहरा मेले का आयोजन होता है। यहां भव्य आयोजन के दौरान 12 देवी-देवता विराजमान होते हैं। पिछले वर्ष साउंड, जनरेटर और नजराने सहित विभिन्न व्यवस्थाओं पर करीब 3.5 लाख रुपये खर्च किए गए थे। वहीं, यहां करीब 2.8 लाख रुपये की आय भी होती है।
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वशिष्ठ दशहरा में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां करीब 10 देवी-देवता विराजमान होते हैं। मेले के दौरान सांस्कृतिक गतिविधियों और अन्य व्यवस्थाओं पर भी खर्च किया जाता है। इस आयोजन से स्थानीय देव परंपराओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
हरिपुर और नगर में दशहरे के दौरान पांच दिन तक मेला चलता है। इन आयोजनों पर करीब 2.5 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है। वहीं, नग्गर के जगतीपट्ट में दशहरे के आयोजन पर करीब 2.35 लाख रुपये व्यय किए जाते हैं। इन आयोजनों में स्थानीय देवी-देवताओं की भागीदारी रहती है और क्षेत्र के लोग उत्साह के साथ शामिल होते हैं।
निरमंड की बूढ़ी दियाली और श्रीखंड महादेव यात्रा जैसे पारंपरिक आयोजनों को भी दशहरा समिति की ओर से सहायता दी जाती है। इन मेलों और आयोजनों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और लोक परंपराओं को संरक्षित रखने का प्रयास किया जाता है।

देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने बताया कि दशहरा समिति से मिलने वाली आर्थिक सहायता इन आयोजनों को जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संवाद

दशहरा उत्सव की तैयारी में जुटे विभाग के कर्मी।-संवाद

दशहरा उत्सव की तैयारी में जुटे विभाग के कर्मी।-संवाद

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