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वामतट पर बैठने वाले हारियानों को मिलें सुविधाएं : जय ठाकुर
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दशहरा ::
बोले, बारिश के दौरान देवलुओं को होती है समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के दौरान वामतट अंगुडोभी के पास बैठने वाले देवी-देवताओं के हारियानों को हर वर्ष समस्याओं का सामना करना पड़ता है। देव संस्कृति शोध संस्थान के अध्यक्ष जय ठाकुर ने बताया कि दशहरा समिति की ओर से यहां टेंट तो उपलब्ध करवाए जाते हैं, लेकिन जगह ढलानदार होने के कारण बारिश का पानी टेंटों में घुस जाता है। इससे देवलुओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
उन्होंने बताया कि इस स्थान पर पांच देवी-देवता विराजमान होते हैं। इनमें जमलू महाराज मलाणा, जीव जमलू जाणा, सरवल नाग सौर, देवता आजीमल नारायण सोयल और शुकली नाग तांदला शामिल हैं। जमलू महाराज मलाणा के पास यहां सरायं बनी हुई है, लेकिन अन्य चार देवी-देवताओं के साथ आने वाले कारकूनों और हारियानों को ठहरने सहित अन्य सुविधाओं की कमी के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा यहां पानी की पर्याप्त व्यवस्था न होने से भी परेशानी होती है।
जय ठाकुर ने दशहरा समिति और प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि पांचों देवी-देवताओं के साथ आने वाले हारियानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इस स्थान पर उचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने यहां शेड या सरायं बनाने की मांग की, ताकि दशहरा उत्सव के सात दिनों के दौरान देवलुओं को बारिश और अन्य असुविधाओं से राहत मिल सके।
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उन्होंने कारदार संघ सहित देवी-देवताओं के नाम पर गठित विभिन्न संगठनों से भी देव समाज की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने और उनके समाधान के लिए मिलकर कार्य करने की अपील की।
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बोले, बारिश के दौरान देवलुओं को होती है समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के दौरान वामतट अंगुडोभी के पास बैठने वाले देवी-देवताओं के हारियानों को हर वर्ष समस्याओं का सामना करना पड़ता है। देव संस्कृति शोध संस्थान के अध्यक्ष जय ठाकुर ने बताया कि दशहरा समिति की ओर से यहां टेंट तो उपलब्ध करवाए जाते हैं, लेकिन जगह ढलानदार होने के कारण बारिश का पानी टेंटों में घुस जाता है। इससे देवलुओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
उन्होंने बताया कि इस स्थान पर पांच देवी-देवता विराजमान होते हैं। इनमें जमलू महाराज मलाणा, जीव जमलू जाणा, सरवल नाग सौर, देवता आजीमल नारायण सोयल और शुकली नाग तांदला शामिल हैं। जमलू महाराज मलाणा के पास यहां सरायं बनी हुई है, लेकिन अन्य चार देवी-देवताओं के साथ आने वाले कारकूनों और हारियानों को ठहरने सहित अन्य सुविधाओं की कमी के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा यहां पानी की पर्याप्त व्यवस्था न होने से भी परेशानी होती है।
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जय ठाकुर ने दशहरा समिति और प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि पांचों देवी-देवताओं के साथ आने वाले हारियानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इस स्थान पर उचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने यहां शेड या सरायं बनाने की मांग की, ताकि दशहरा उत्सव के सात दिनों के दौरान देवलुओं को बारिश और अन्य असुविधाओं से राहत मिल सके।
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उन्होंने कारदार संघ सहित देवी-देवताओं के नाम पर गठित विभिन्न संगठनों से भी देव समाज की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने और उनके समाधान के लिए मिलकर कार्य करने की अपील की।