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सेंटारोजा प्लम पर भारी पड़ी नाशपाती
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कुल्लू। जिले की सब्जी मंडियों में नाशपाती की भारी खेप पहुंचते ही अब प्लम के दामों में गिरावट आ गई है। मंडियों में सेंटा रोजा प्लम के 50 फीसदी दाम कम हो गए हैं। शुरूआती दौर में प्लम 80 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, जो अब घटकर 35 से 40 रुपये प्रति किलो रह गया है। स्थानीय सब्जी मंडियों में प्लम के दाम कम होने से बागवानों को घाटा उठाना पड़ा है।
जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इन दिनों सेंटारोजा प्लम का तुड़ान चल रहा है। सेंटारोजा कम आने के कारण व्यापारियों के पास पूरी गाड़ी नहीं निकल रही है। ऐसे में मंडियों में आए हुए व्यापारी अब प्लम की बजाय नाशपाती खरीदने को ही तरजीह दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि कोरोना के बीच नाशपाती की काफी डिमांड आ रही है। ऐसे में व्यापारी नाशपाती खरीदकर इसे देश की विभिन्न मंडियों में पहुंचा रहे हैं। इससे सेंटारोजा प्लम बेचने आ रहे बागवानों को मायूसी हाथ लग रही है। बागवान मेहर चंद, दिनेश ठाकुर, हेम राज और नाथू राम ने कहा कि शुक्रवार को उन्होंने सब्जी मंडी बंदरोल में प्लम बेचने के लिए भेजा था, जो 35 से 40 रुपये प्रति किलो तक बिका था। बागवानों ने सेब के पौधों के बीच में ही सेंटारोजा व मैरीपोजा प्लम के पौधे लगाए हुए हैं, जो हर साल अच्छे फल देने लगे हैं। आने वाले समय में बागवानों के पास सेब फसल न होने पर प्लम एक विकल्प के तौर रहेगा। उधर, इस संबंध में आढ़ती यूनियन बंदरोल के अध्यक्ष मोहन लाल ठाकुर ने कहा कि कम प्लम आने से दामों पर असर पड़ा है। अब व्यापारी नाशपाती को खरीदने के लिए उत्साह दिखा रहे हैं।
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जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इन दिनों सेंटारोजा प्लम का तुड़ान चल रहा है। सेंटारोजा कम आने के कारण व्यापारियों के पास पूरी गाड़ी नहीं निकल रही है। ऐसे में मंडियों में आए हुए व्यापारी अब प्लम की बजाय नाशपाती खरीदने को ही तरजीह दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि कोरोना के बीच नाशपाती की काफी डिमांड आ रही है। ऐसे में व्यापारी नाशपाती खरीदकर इसे देश की विभिन्न मंडियों में पहुंचा रहे हैं। इससे सेंटारोजा प्लम बेचने आ रहे बागवानों को मायूसी हाथ लग रही है। बागवान मेहर चंद, दिनेश ठाकुर, हेम राज और नाथू राम ने कहा कि शुक्रवार को उन्होंने सब्जी मंडी बंदरोल में प्लम बेचने के लिए भेजा था, जो 35 से 40 रुपये प्रति किलो तक बिका था। बागवानों ने सेब के पौधों के बीच में ही सेंटारोजा व मैरीपोजा प्लम के पौधे लगाए हुए हैं, जो हर साल अच्छे फल देने लगे हैं। आने वाले समय में बागवानों के पास सेब फसल न होने पर प्लम एक विकल्प के तौर रहेगा। उधर, इस संबंध में आढ़ती यूनियन बंदरोल के अध्यक्ष मोहन लाल ठाकुर ने कहा कि कम प्लम आने से दामों पर असर पड़ा है। अब व्यापारी नाशपाती को खरीदने के लिए उत्साह दिखा रहे हैं।
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