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Kullu News: कम बारिश से मटर की फसल में 15 से 20 दिन की देरी
Thu, 15 Oct 2026 10:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 15 Oct 2026 10:26 AM IST
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रघुपुर घाटी में मटर की खेती में आए फूल। संवाद
कुल्लू। मानसून में कम बारिश का असर अब जिले में मटर की फसल पर दिखने लगा है। खेतों में नमी की कमी से इस बार फसल 15 से 20 दिन देरी से तैयार हो रही है।
सैंज घाटी में मटर का तुड़ान शुरू हो गया है, जबकि बाह्य सराज की रघुपुर घाटी, कराड़ और खनाग में कई खेतों में अभी फूल आ रहे हैं। हालांकि जिले के अधिकांश क्षेत्रों में फसल अच्छी होने से किसान खुश हैं लेकिन देरी से मंडियों में पहुंचने के कारण उचित दाम मिलने की चिंता भी सता रही है।
मटर कुल्लू के किसानों की आय का प्रमुख जरिया है। आमतौर पर अक्तूबर में किसान फसल मंडियों में भेजना शुरू कर देते हैं लेकिन इस बार कम बारिश से फसल तैयार होने में देरी हो रही है।
किसान राज कुमार, धर्म सिंह, अशोक कुमार, सोहन लाल, किशोरी लाल, कमल दास और टेक सिंह ने बताया कि खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से फसल का विकास धीमा हुआ है।
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अब दशहरा के आसपास यानी 20 अक्तूबर के बाद तुड़ान तेज होने की उम्मीद है। वहीं, कुछ क्षेत्रों में नमी की कमी से पौधे फूल आने से पहले ही मुरझा गए हैं, जिससे किसानों को नुकसान हुआ है।
मानसून में सामान्य से 36 फीसदी कम बारिश
जिले में इस वर्ष जून से अगस्त तक मानसून के तीन महीनों में 268.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि वर्ष 2025 में इसी अवधि के दौरान 526.2 मिलीमीटर बारिश हुई थी। बागवानी अनुसंधान केंद्र सेऊबाग की कृषि मौसम क्षेत्रीय इकाई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जोगिंद्र सिंह और शोध सहयोगी डॉ. अभय शर्मा ने कहा कि कम बारिश से मिट्टी की नमी और जल उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसका असर रबी फसलों की बुआई, अंकुरण और बागवानी फसलों पर भी पड़ सकता है।
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सैंज घाटी में मटर का तुड़ान शुरू हो गया है, जबकि बाह्य सराज की रघुपुर घाटी, कराड़ और खनाग में कई खेतों में अभी फूल आ रहे हैं। हालांकि जिले के अधिकांश क्षेत्रों में फसल अच्छी होने से किसान खुश हैं लेकिन देरी से मंडियों में पहुंचने के कारण उचित दाम मिलने की चिंता भी सता रही है।
मटर कुल्लू के किसानों की आय का प्रमुख जरिया है। आमतौर पर अक्तूबर में किसान फसल मंडियों में भेजना शुरू कर देते हैं लेकिन इस बार कम बारिश से फसल तैयार होने में देरी हो रही है।
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किसान राज कुमार, धर्म सिंह, अशोक कुमार, सोहन लाल, किशोरी लाल, कमल दास और टेक सिंह ने बताया कि खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से फसल का विकास धीमा हुआ है।
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अब दशहरा के आसपास यानी 20 अक्तूबर के बाद तुड़ान तेज होने की उम्मीद है। वहीं, कुछ क्षेत्रों में नमी की कमी से पौधे फूल आने से पहले ही मुरझा गए हैं, जिससे किसानों को नुकसान हुआ है।
मानसून में सामान्य से 36 फीसदी कम बारिश
जिले में इस वर्ष जून से अगस्त तक मानसून के तीन महीनों में 268.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि वर्ष 2025 में इसी अवधि के दौरान 526.2 मिलीमीटर बारिश हुई थी। बागवानी अनुसंधान केंद्र सेऊबाग की कृषि मौसम क्षेत्रीय इकाई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जोगिंद्र सिंह और शोध सहयोगी डॉ. अभय शर्मा ने कहा कि कम बारिश से मिट्टी की नमी और जल उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसका असर रबी फसलों की बुआई, अंकुरण और बागवानी फसलों पर भी पड़ सकता है।