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Kullu News: खतरे में जिंदगी... रांगड़ी में तीन दशक से रोज दरक रहा पहाड़
Sun, 07 Sep 2025 10:11 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 07 Sep 2025 10:11 PM IST
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गांव के कई घरों को अपनी चपेट में ले सकता है खनेड़ में हो रहा भूस्खलन
साल 1995 से चल रही समस्या का अभी तक नहीं हो पाया स्थायी समाधान
सरकार और प्रशासन भी नहीं ले रहे सुध, डर के साये में जी रहे हैं ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। मनाली की सरसेई पंचायत के रांगड़ी गांव में पहाड़ अब जमीन नहीं, एक डर बनकर खड़ा है। खनेड़ में हो रहा लगातार भूस्खलन गांव के कई घरों को अपनी चपेट में ले सकता है।
समस्या कोई नई नहीं, 1995 से अब तक ग्रामीण प्रशासन से राहत की आस में हैं लेकिन उन्हें सिर्फ बारिश, दरकती ज़मीन और खामोश सिस्टम मिला है। गांव के लोग रोज उजाला इसी डर से देख रहे हैं कि शायद ये दिन उनका आखिरी सुरक्षित दिन न हो। प्रशासनिक दौरे और आश्वासन आते-जाते रहते हैं लेकिन स्थायी समाधान अब भी कागजों में दफन है।
स्थानीय ग्रामीण कृष्ण, केहर सिंह, होतम राम, योगराज, चनेराम बोधराज, गंगाराम, सुभाष कुमार, पुने राम, छबील कुमार, मेहरचंद, डोला राम, गांथू राम, दीपू और रमेश ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में समस्या गंभीर हो गई है। हम हर रोज डर के साये में जी रहे हैं। खनेड़ में लगातार हो रहे भूस्खलन से मकानों को भारी खतरा बन गया है। गांव में कहीं भी बड़ी आपदा आ सकती है। वर्ष 1995 में जब पहली बार भारी भूस्खलन हुआ था, तब से लेकर आज तक हम लगातार सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। स्थानीय पंचायत प्रधान भी इस गंभीर समस्या से अनभिज्ञ नहीं हैं। कई बार जिला प्रशासन को लिखित में सूचित किया लेकिन कार्रवाई की गति अत्यंत धीमी है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल राहत कार्य करने, स्थायी रोकथाम के उपाय अपनाने, विशेषज्ञों की टीम भेजकर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन करवाने की मांग की है। उधर, उपमंडल अधिकारी रमण कुमार शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों को मौके का दौरा करने के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद समाधान को लेकर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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साल 1995 से चल रही समस्या का अभी तक नहीं हो पाया स्थायी समाधान
सरकार और प्रशासन भी नहीं ले रहे सुध, डर के साये में जी रहे हैं ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। मनाली की सरसेई पंचायत के रांगड़ी गांव में पहाड़ अब जमीन नहीं, एक डर बनकर खड़ा है। खनेड़ में हो रहा लगातार भूस्खलन गांव के कई घरों को अपनी चपेट में ले सकता है।
समस्या कोई नई नहीं, 1995 से अब तक ग्रामीण प्रशासन से राहत की आस में हैं लेकिन उन्हें सिर्फ बारिश, दरकती ज़मीन और खामोश सिस्टम मिला है। गांव के लोग रोज उजाला इसी डर से देख रहे हैं कि शायद ये दिन उनका आखिरी सुरक्षित दिन न हो। प्रशासनिक दौरे और आश्वासन आते-जाते रहते हैं लेकिन स्थायी समाधान अब भी कागजों में दफन है।
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स्थानीय ग्रामीण कृष्ण, केहर सिंह, होतम राम, योगराज, चनेराम बोधराज, गंगाराम, सुभाष कुमार, पुने राम, छबील कुमार, मेहरचंद, डोला राम, गांथू राम, दीपू और रमेश ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में समस्या गंभीर हो गई है। हम हर रोज डर के साये में जी रहे हैं। खनेड़ में लगातार हो रहे भूस्खलन से मकानों को भारी खतरा बन गया है। गांव में कहीं भी बड़ी आपदा आ सकती है। वर्ष 1995 में जब पहली बार भारी भूस्खलन हुआ था, तब से लेकर आज तक हम लगातार सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। स्थानीय पंचायत प्रधान भी इस गंभीर समस्या से अनभिज्ञ नहीं हैं। कई बार जिला प्रशासन को लिखित में सूचित किया लेकिन कार्रवाई की गति अत्यंत धीमी है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल राहत कार्य करने, स्थायी रोकथाम के उपाय अपनाने, विशेषज्ञों की टीम भेजकर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन करवाने की मांग की है। उधर, उपमंडल अधिकारी रमण कुमार शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों को मौके का दौरा करने के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद समाधान को लेकर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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