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मुखौटे पहन अश्लील जुमलों से भगाए भूत-पिशाच
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कुल्लू जिला के बंजार की तीर्थन घाटी के तिंदर गांव में मुखौटे और पारंपरिक परिधानों को पहनकर नृत्य
- फोटो : Kullu
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गुशैणी (कुल्लू)। जिले के बंजार की तीर्थन और जिभी घाटी में विष्णु नारायण को समर्पित फागली उत्सव की धूम है। इसमें प्राचीन दैवीय परंपरा का निर्वहन किया गया। अश्लील जुमले कसते हुए ढोल-नगाड़ों की थाप पर हारियानों ने मडियाहला (मुखौटा) नृत्य कर भूत-पिशाचों को भगाया।
यह फागली तीर्थन घाटी के डिंगचा, तिंदर, नाहीं, पेखडी, फ्रेडी, शील और जिभी के सजवाड़, हिडिब और चैहणी में मनाई गई। इस परंपरागत दैवीय रिवायत और प्राचीन नृत्य को देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ी। फागली उत्सव में क्षेत्र के विशेष देवताओं से जुड़े लोगों और कारकूनों बीठ मडियाहली पहन कर परंपरा निभाते हुए अश्लील जुमले सुनाए। कई जगह मुखौटाधारियों हारियानों ने दहकते अंगारों पर कूदकर नृत्य किया गया। यह दैवीय नृत्य कई घंटों तक चला, लेकिन दहकते अंगारों से किसी को कोई नुकसान नहीं होता देख लोग दंग रह गए। इसके अलावा देवता के गूर कड़कड़ाती सर्दी में ठंडे पानी के कुंड में दिन भर खड़े रहे और आम लोगों को आशीर्वाद देते रहे। रविवार दोपहर को नरगिस के फूलों से तैयार किए गए विष्णु अवतार बीठ को हिडिब में खुले स्थान पर नचाया गया, जिसे पकड़ने के लिए लोग काफी समय से इंतजार कर रहे थे।
रामायण, महाभारत काल के युद्ध का हुआ वर्णन
साठ मढ़ियाल्ले यानी मुखौटाधारियों ने देवता के समक्ष रामायण और महाभारत के युद्ध का वर्णन कर नृत्य किया। देव परंपरा के अनुसार यह उत्सव देवताओं और राक्षकों के रामायण और महाभारत काल के युद्ध के स्वरूप को दोहराता है। खास कर समुद्र मंथन का जिक्र भी उत्सव में होता है। मान्यता है कि यहां के देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर होते हैं और क्षेत्रों में भूत-प्रेतों का वास रहता है। इन प्रेत आत्माओं व भूतों को भगाने के लिए फागली उत्सव मनाया जाता है। माता गाड़ा दुर्गा गुशैणी के कारदार मुरारी लाल शर्मा ने बताया कि माता गाड़ा दुर्गा के बांदल के साथ लगते गांव में यह उत्सव नहीं मनाया जाता है, क्योंकि माता के यहां अश्लील शब्द बोलना निषेध है। अन्य गांवों में फागली उत्सव की धूम रही।
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सोयल में फागली उत्सव का आगाज
हरिपुर (कुल्लू)। सोयल पंचायत में रविवार से फागली उत्सव का आगाज हुआ। यह उत्सव जमदग्नि ऋषि को समर्पित है, जो आगामी चार दिन तक मनाया जाएगा। इस उत्सव की खासियत यह है कि इसमें देवता से संबंधित सभी निशान साल में एक बार ही मूल निवास स्थान से बाहर निकाले जाते हैं। इसमें उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। देवता के कारदार लुदर चंद ठाकुर व पुजारी यशवंत ने बताया कि उत्सव चार दिन तक चलेगा। सरसेई पंचायत में पियूणी नाग को समर्पित फागली का समापन हुआ है।
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यह फागली तीर्थन घाटी के डिंगचा, तिंदर, नाहीं, पेखडी, फ्रेडी, शील और जिभी के सजवाड़, हिडिब और चैहणी में मनाई गई। इस परंपरागत दैवीय रिवायत और प्राचीन नृत्य को देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ी। फागली उत्सव में क्षेत्र के विशेष देवताओं से जुड़े लोगों और कारकूनों बीठ मडियाहली पहन कर परंपरा निभाते हुए अश्लील जुमले सुनाए। कई जगह मुखौटाधारियों हारियानों ने दहकते अंगारों पर कूदकर नृत्य किया गया। यह दैवीय नृत्य कई घंटों तक चला, लेकिन दहकते अंगारों से किसी को कोई नुकसान नहीं होता देख लोग दंग रह गए। इसके अलावा देवता के गूर कड़कड़ाती सर्दी में ठंडे पानी के कुंड में दिन भर खड़े रहे और आम लोगों को आशीर्वाद देते रहे। रविवार दोपहर को नरगिस के फूलों से तैयार किए गए विष्णु अवतार बीठ को हिडिब में खुले स्थान पर नचाया गया, जिसे पकड़ने के लिए लोग काफी समय से इंतजार कर रहे थे।
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रामायण, महाभारत काल के युद्ध का हुआ वर्णन
साठ मढ़ियाल्ले यानी मुखौटाधारियों ने देवता के समक्ष रामायण और महाभारत के युद्ध का वर्णन कर नृत्य किया। देव परंपरा के अनुसार यह उत्सव देवताओं और राक्षकों के रामायण और महाभारत काल के युद्ध के स्वरूप को दोहराता है। खास कर समुद्र मंथन का जिक्र भी उत्सव में होता है। मान्यता है कि यहां के देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर होते हैं और क्षेत्रों में भूत-प्रेतों का वास रहता है। इन प्रेत आत्माओं व भूतों को भगाने के लिए फागली उत्सव मनाया जाता है। माता गाड़ा दुर्गा गुशैणी के कारदार मुरारी लाल शर्मा ने बताया कि माता गाड़ा दुर्गा के बांदल के साथ लगते गांव में यह उत्सव नहीं मनाया जाता है, क्योंकि माता के यहां अश्लील शब्द बोलना निषेध है। अन्य गांवों में फागली उत्सव की धूम रही।
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सोयल में फागली उत्सव का आगाज
हरिपुर (कुल्लू)। सोयल पंचायत में रविवार से फागली उत्सव का आगाज हुआ। यह उत्सव जमदग्नि ऋषि को समर्पित है, जो आगामी चार दिन तक मनाया जाएगा। इस उत्सव की खासियत यह है कि इसमें देवता से संबंधित सभी निशान साल में एक बार ही मूल निवास स्थान से बाहर निकाले जाते हैं। इसमें उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। देवता के कारदार लुदर चंद ठाकुर व पुजारी यशवंत ने बताया कि उत्सव चार दिन तक चलेगा। सरसेई पंचायत में पियूणी नाग को समर्पित फागली का समापन हुआ है।