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Kullu News: छिद्रा अनुष्ठान में मांगी गलतियों की माफी
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देव आदेश पर ढालपुर मैदान में हुआ अनुष्ठान
1947 से लेकर 1971 के गोलीकांड और 1984 के सिख नरसंहार तक का किया गया स्मरण
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में देव आदेश के चलते वीरवार को छिद्रा अनुष्ठान का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज से हुईं विभिन्न गलतियों के लिए देवी-देवताओं के समक्ष माफी मांगी गई। धार्मिक अनुष्ठान में देव समाज से जुड़े कारकूनों और श्रद्धालुओं ने भाग लेकर देव परंपरा का निर्वहन किया।
भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह ने बताया कि देव आदेश के अनुसार समय-समय पर इस तरह के धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते रहे हैं। इस बार ढालपुर मैदान में वीरनाथ गौहरी के स्थान पर छिद्रा अनुष्ठान किया गया। अनुष्ठान के दौरान बीते वर्षों में हुई विभिन्न मानव गलतियों के लिए देवताओं के समक्ष क्षमा याचना की गई।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1947 में हुए हिंदू-मुस्लिम नरसंहार, वर्ष 1971 में ढालपुर में हुए गोलीकांड और वर्ष 1984 में हुए सिख नरसंहार जैसी घटनाओं के साथ कोरोना काल के दौरान देवी-देवताओं को निमंत्रण नहीं दिए जाने की गलती के लिए भी माफी मांगी गई। इसके अलावा अन्य ऐसी घटनाओं और गलतियों का भी स्मरण किया गया, जिन्हें मानवीय भूल माना गया।
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छिद्रा अनुष्ठान में देवता बिजली महादेव, देवता आदि ब्रह्मा, देवता जमदग्नि ऋषि, माता त्रिपुरा सुंदरी और माता दोचा मोचा नग्गर के कारकूनों ने देव निशान से साथ भाग लिया। देव परंपरा के अनुसार विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न करवाया गया। कारदार दानवेंद्र सिंह ने कहा कि देव आदेश पर समाज के उत्थान और सुख सम़ृद्धि के लिए इस तरह के अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।
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1947 से लेकर 1971 के गोलीकांड और 1984 के सिख नरसंहार तक का किया गया स्मरण
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में देव आदेश के चलते वीरवार को छिद्रा अनुष्ठान का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज से हुईं विभिन्न गलतियों के लिए देवी-देवताओं के समक्ष माफी मांगी गई। धार्मिक अनुष्ठान में देव समाज से जुड़े कारकूनों और श्रद्धालुओं ने भाग लेकर देव परंपरा का निर्वहन किया।
भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह ने बताया कि देव आदेश के अनुसार समय-समय पर इस तरह के धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते रहे हैं। इस बार ढालपुर मैदान में वीरनाथ गौहरी के स्थान पर छिद्रा अनुष्ठान किया गया। अनुष्ठान के दौरान बीते वर्षों में हुई विभिन्न मानव गलतियों के लिए देवताओं के समक्ष क्षमा याचना की गई।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 1947 में हुए हिंदू-मुस्लिम नरसंहार, वर्ष 1971 में ढालपुर में हुए गोलीकांड और वर्ष 1984 में हुए सिख नरसंहार जैसी घटनाओं के साथ कोरोना काल के दौरान देवी-देवताओं को निमंत्रण नहीं दिए जाने की गलती के लिए भी माफी मांगी गई। इसके अलावा अन्य ऐसी घटनाओं और गलतियों का भी स्मरण किया गया, जिन्हें मानवीय भूल माना गया।
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छिद्रा अनुष्ठान में देवता बिजली महादेव, देवता आदि ब्रह्मा, देवता जमदग्नि ऋषि, माता त्रिपुरा सुंदरी और माता दोचा मोचा नग्गर के कारकूनों ने देव निशान से साथ भाग लिया। देव परंपरा के अनुसार विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न करवाया गया। कारदार दानवेंद्र सिंह ने कहा कि देव आदेश पर समाज के उत्थान और सुख सम़ृद्धि के लिए इस तरह के अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।