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शहीद को सम्मान दिलाने के लिए लड़ने को मजबूर परिवार
शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 14 Aug 2021 10:08 PM IST
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कुल्लू फटाफट
कुल्लू जिला के पुईद में शहीद बालकृष्ण के परिजनों ने घर में बनाई मूर्ति।
- फोटो : Kullu
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कुल्लू। एक ओर जहां आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर खराहल घाटी के पूईद गांव के शहीद पैराट्रूपर बालकृष्ण को सरकार व प्रशासन ने शहादत के करीब 15 महीने बीत जाने के बाद भी सम्मान नहीं दिया है।
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शहीद के पिता महेंद्र सिंह ने कहा कि बालाकोट और कुपवाड़ा में हुई सर्जिकल स्ट्राइक में भी बालकृष्ण शामिल था। इस बात का पता उन्हें सेेना के अधिकारियों से पता चला। शहीद के सम्मान के लिए उसके पिता एक साल तक सरकार और प्रशासन की ओर टकटकी लगाए रहे। लेकिन उन्हें मंत्रियों, प्रशासन की ओर से कोरे आश्वासन ही मिलते रहे। आखिर में थक हारकर शहीद के पिता ने अप्रैल 2021 में अपने घर में ही बालकृष्ण की प्रतिमा लगा दी थी। हालांकि प्रतिमा को बनाने वाले मूर्तिकार ने उनसे एक भी पैसा नहीं लिया। इसके साथ ही शहीद पैराट्रूपर बालकृष्ण की फौज के दौरान इस्तेमाल की गई वर्दी आदि चीजों को संभालने के लिए एक म्यूजियम भी बनाया है। यहां पर शहीद की यादों को संजोया है। अनदेखी पर शहीद के पिता ने सरकार की ओर से दी जाने वाली 20 लाख की राशि को नहीं लेने का फैसला किया है। गौर रहे कि शहीद पैराट्रूपर बालकृष्ण (25) खराहल घाटी में पूईद गांव का रहने वाला था। यह वर्ष 2016 में सेना में भर्ती हुआ था। यह जिले का पहला पैराट्रूपर था। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में ऑपरेशन रंगडोरी बैहक में अदम्य साहस दिखाते हुए बालकृष्ण 5 अप्रैल 2020 को शहीद हो गया था। शहीद के परिजन और घाटी की जनता अब शहीद स्मारक बनाने और नामकरण करने की मांग पर अड़े हैं। शहीद के पिता महेंद्र सिंह ने कहा कि प्रशासन व सरकार को 15 अगस्त तक समय दिया गया है। अगर सरकार शहीद के नाम पर कुल्लू कॉलेज, क्षेत्रीय अस्पताल और बस स्टैंड सरवरी का नाम शहीद के नाम पर नहीं रखा जाता है तो वह अपनी पत्नी के साथ उपायुक्त कार्यालय के बाहर अनशन पर बैठेंगे। ग्राम पंचायत पूईद के प्रधान सरचंद ठाकुर ने कहा कि मांगें पूरी न होने तक पंचायत की जनता शहीद परिवार का साथ देगी।
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