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ढालपुर पहुंचे सैकड़ों देवता, सूने पड़े देवालय
कुल्लू
Updated Wed, 12 Oct 2016 09:42 PM IST
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devta
- फोटो : demo pic
जिले के देवी देवताओं के दशहरा उत्सव में शरीक होने से घाटी के देवालय सूने पड़ गए हैं। अब जिला में अगले दो सप्ताह तक कोई भी देव कारज नहीं होंगे। देवी देवताओं के बगैर सुने पड़े मंदिरों से अब उनके श्रद्धालु भी अपने आराध्य देव के दर्शन भी नहीं कर पाएंगे। इधर, ऐतिहासिक ढालपुर में सैकड़ों देवी देवताओं के एकत्रित होने से रघुनाथ की नगरी स्वर्ग लोक में तबदील हो गई है। ढोल-नगाड़ों, करनाल, नरसिंगों, करनाल व शहनाई की स्वरलहरियों से पूरी ढालपुर मधुर ध्वनि से गूंज उठा है। देव व मानस के इस अलौकिक व अद्भुत नजारे का माहौल मंगलवार सुबह से देखते बन रहा है।
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हालांकि अधिकतर देवी-देवता दशहरा की पूर्व संध्या में अपने अस्थायी शिविरों में विराजमान हो गए थे, लेकिन मंगलवार सुबह भी कई देवता अपने अस्थायी शिविर पहुंचे। इसमें अधिष्ठाता देव खुडीजल व बालूनाग भी शामिल हैं। देवता खुडीजल के देवलु रमेश ठाकुर, हंस राज, बालक राम, तिलक राज, ओम प्रकाश तथा हीरा लाल के अनुसार देवता खुडीजल के दशहरा में शरीक होने से पूरी घाटी में सन्नाटा सा छा गया है। देवता खुडीजल पर छहगढ़ के हजारों लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है।
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वहीं बिजली महादेव, शृंगा ऋषि, ब्यास ऋषि, टकरासी नाग, कोट पझारी, शेष नाग, लक्ष्मी नारायण, माता बूढ़ी नागिन घियागी, देवता चंभू और माता हिडिंबा आदि समेत सैकड़ों देवी देवताओं के दशहरा में आने से निरमंड, आनी, बंजार, सैंज, गड़सा, मणिकर्ण, खराहल, बजौरा, लगवैली तथा ऊझी घाटी के देवालय देवताओं के बिना सूने पड़े गए हैं। इस देवालयों में अब अगलेे दो 10 से 15 दिन बाद रौनक आएगी। जिला देवी देवता कारदार संघ के प्रधान दोत राम ठाकुर ने कहा कि दशहरा के चलते जिला में कई देवी-देवताओं के देवालय में देव कारज नहीं होंगे।
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