लाहौली सेब की क्वालिटी बढ़िया, दाम कम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शीत मरुस्थल लाहौल घाटी में उत्पादित सेब के गुणवत्ता काफी प्रसिद्ध है। क्वालिटी में बढ़िया होने के बावजूद बागवानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। यहां उत्पादित रसदार सेब बाजार में आने को तैयार है। सेब तुड़ान का कार्य शुरू हो गया है। वहीं उम्मीद के मुताबिक बागवानों को बेहतर दाम नहीं मिलने से उनके चेहरों पर मायूसी है। मजबूरन बागवानों को बेहतर क्वालिटी के सेब को प्रति पेटी एक हजार से 1200 रुपये तक बेचना पड़ रहा है। बागवानी विभाग लाहौल के फाइलों में इस समय महज 800 हेक्टेयर में सेब का उत्पादन हो रहा है। घाटी के बागवानों ने विभिन्न प्रजाति के सेब लाहौल घाटी में तैयार कर रखे हैं।
बागवानों को कहना है कि रोहतांग टनल के बन जाने के बाद लाहौल बीज आलू की तर्ज पर सेब को भी एक नई दिशा मिलेगी। उनके अनुसार रोहतांग दर्रे में अब कभी भी हिमपात से मार्ग अवरुद्ध हो सकती है। लिहाजा, इसी मद्देनजर बागवान बिचौलियों के हाथ पिस रहे हैं। लाहौल घाटी में सेब तुड़ान का कार्य शुरू हो गया है। असमय तैयार होने वाली इस सेब को बेहतर दाम नहीं मिलने से बागवान अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे हैं। बेहतर क्वालिटी के सेब को एक हजार से 1200 रुपये तक ही दाम मिल रहा है।
बागवान रमेश कुमार, राजू, महेंद्र, दिनेश, शमशेर सिंह और सुरेश कुमार ने बताया कि लाहौल घाटी में बागवानों ने रायल डेलिशियस, वांस डेलिशियस, गोल्डन, सुपर चीप, रेड चीप, आरगेन सपर टू, टॉप रेड, गेलगाला सहित रूट स्ट्राक में सुपर चीप, रेड विलोक्स, आरगेन सपर टू, सकारलेट सपर टू, रेडलम, गाला गेल सहित गाला आदि विभिन्न प्रजाति के सेब तैयार कर रखे हैं, लेकिन बेहतर दाम नहीं मिलने से उन्हें मुनाफा तो दूर मेहनत का बेहतर फल नहीं है। वहीं किन्नौर का सेब 1800 से 2100 रूपये तक प्रति पेटी बिक रहा है। इधर, बागवानी उपनिदेशक लाहौल डॉ सोनम ने कहा कि लाहौली सेब में छिलके मोटे और रसदार भी हैं।