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Kullu News: मौसम परिवर्तन से माइट रोग की चपेट में सेब के बगीचे
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पत्तों की कमजोरी से फल उत्पादन पर पड़ेगा विपरीत असर
संवाद न्यूज एजेंसी
पतलीकूहल (कुल्लू)। मौसम परिवर्तन के कारण सेब के बगीचे माइट रोग की चपेट में आ रहे हैं। ऊझी घाटी के नग्गर, रूमसू, बाड़ी, फोजल आदि में माइट कीटों की समस्या देखने को मिल रही है। इन क्षेत्रों में माइट रोग का संक्रमण बगीचों में बहुत तेजी से फैल रहा है। माइट कीट पत्तों का रस चूसते हैं, जिस कारण पत्तों में क्लोरोफिल की कमी हो जाती है। पत्तों में हरापन कम होने लगता है। पत्तों में कमजोरी के चलते फलों की गुणवत्ता और उत्पादन पर विपरीत असर पड़ता है। सेब के आकार में वृद्धि नहीं हो पाती है। ऐसे में बागवानों को अपनी फसल की चिंता सताने लगी है।
उधर, कुल्लू फलोत्पादक मंडल के प्रधान महेंद्र उपाध्याय ने कहा कि बागवानों को अपने बगीचे में नजर रखनी चाहिए। पेड़ों और छोटे पौधों में अगर माइट के लक्षण दिखते हैं, तो इसकी रोकथाम के लिए उद्यान विभाग की ओर से अनुमोदित की गई दवाइयों का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में सेब के पेड़ों पर कई प्रकार के कीट हमला करते हैं, जिस कारण फलों को नुकसान पहुंचता है। इसलिए बागवान विभाग की स्प्रे सारिणी के अनुसार अनुमोदित की गई दवाइयों का प्रयोग करना सुनिश्चित करें। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
पतलीकूहल (कुल्लू)। मौसम परिवर्तन के कारण सेब के बगीचे माइट रोग की चपेट में आ रहे हैं। ऊझी घाटी के नग्गर, रूमसू, बाड़ी, फोजल आदि में माइट कीटों की समस्या देखने को मिल रही है। इन क्षेत्रों में माइट रोग का संक्रमण बगीचों में बहुत तेजी से फैल रहा है। माइट कीट पत्तों का रस चूसते हैं, जिस कारण पत्तों में क्लोरोफिल की कमी हो जाती है। पत्तों में हरापन कम होने लगता है। पत्तों में कमजोरी के चलते फलों की गुणवत्ता और उत्पादन पर विपरीत असर पड़ता है। सेब के आकार में वृद्धि नहीं हो पाती है। ऐसे में बागवानों को अपनी फसल की चिंता सताने लगी है।
उधर, कुल्लू फलोत्पादक मंडल के प्रधान महेंद्र उपाध्याय ने कहा कि बागवानों को अपने बगीचे में नजर रखनी चाहिए। पेड़ों और छोटे पौधों में अगर माइट के लक्षण दिखते हैं, तो इसकी रोकथाम के लिए उद्यान विभाग की ओर से अनुमोदित की गई दवाइयों का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में सेब के पेड़ों पर कई प्रकार के कीट हमला करते हैं, जिस कारण फलों को नुकसान पहुंचता है। इसलिए बागवान विभाग की स्प्रे सारिणी के अनुसार अनुमोदित की गई दवाइयों का प्रयोग करना सुनिश्चित करें। संवाद
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