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Kullu News: सालभर के बाद देवी-देवताओं ने किया मिलन
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दशहरा उत्सव के मौके पर सुल्तानपुर में भगवान रघुनाथ के दरवार में हाजरी भरते देवता।-संवाद
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं की उपस्थिति से अठारह करड़ू की सौह स्वर्गलोक में बदल गई है। दशहरा उत्सव के दौरान सालभर के लंबे अंतराल के बाद घाटी के देवी-देवता एक-दूसरे से मिले। देव मिलन की परंपरा का निर्वहन करते हुए देवी-देवताओं ने एक-दूसरे के शिविरों में पहुंचकर भेंट की। देवभूमि कुल्लू में इस अलौकिक दृश्य को देखकर श्रद्धालु भी भावविभोर हो उठे।
देवमिलन के दौरान देव वाद्ययंत्रों की गूंज और नरसिंगों की मधुर स्वरलहरियों से पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया। देवी-देवताओं के साथ आए देवलू और कारकून पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर नाचते-गाते और झूमते नजर आए।
देव परंपराओं और लोक संस्कृति से सजे इस आयोजन ने कुल्लू दशहरा की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा दिया। देवभूमि की इस अनूठी परंपरा में देवी-देवताओं का मिलन केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आपसी मेलजोल, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। सालभर अपने-अपने मंदिरों में विराजमान रहने वाले देवी-देवताओं का दशहरा में एकत्र होना कुल्लू की सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत करता है। संवाद
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देवमिलन के दौरान देव वाद्ययंत्रों की गूंज और नरसिंगों की मधुर स्वरलहरियों से पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया। देवी-देवताओं के साथ आए देवलू और कारकून पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर नाचते-गाते और झूमते नजर आए।
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देव परंपराओं और लोक संस्कृति से सजे इस आयोजन ने कुल्लू दशहरा की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा दिया। देवभूमि की इस अनूठी परंपरा में देवी-देवताओं का मिलन केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आपसी मेलजोल, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। सालभर अपने-अपने मंदिरों में विराजमान रहने वाले देवी-देवताओं का दशहरा में एकत्र होना कुल्लू की सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत करता है। संवाद
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