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पर्यावरण बचाने के लिए संतुलन आवश्यक : पाड़कर
Updated Sat, 10 Jun 2017 10:04 PM IST
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कुल्लू। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से कुल्लू के देवसदन में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संगठन मंत्री श्रीधर पराड़कर विशेष तौर पर उपस्थित रहे। इस दौरान पराड़कर ने महिला पत्रकार लवलीन थरमाणी को पत्रकारिता क्षेत्र में रचनात्मक लेखन के लिए उत्कृष्ट सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया।
इस अवसर पर श्रीधर पाड़कर ने कहा कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी को आयोजन करने का मूल उद्देश्य भारतीय संस्कृति में पर्यावरण के महत्व के बारे में अवगत करवाना है। पर्यावरण वैदिक काल से ही भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग रही है और वर्तमान व भविष्य में भी इसे बनाए रखना अति आवश्यक है। अखिल भारतीय परिषद विश्व की साहित्य परिषद है। जिसकी राष्ट्र के भीतर 460 इकाइयों में चल रही है। साहित्य समाज का आइना है। साहित्यकार में उसके इर्द-गिर्द का परिवेश उसकी लेखनी में झलकता है। वर्तमान में भारतीय साहित्य में पर्यावरण के प्रति हर लेखक सजग है। विश्व पर्यावरण का बचाने के लिए हमारे आदि काल से लेकर अब तक लेख लिखें जा रहे है। उन्होंने प्रकृति को बचाने के लिए संतुलन पर जोर दिया। इस मौके पर राष्ट्रीय महामंत्री ऋषि कुमार, हरियाणा साहित्य अकादमी के अश्वनी कुमार, प्रदेश की प्रांतीय अध्यक्ष रीता सिंह ने भी अपने विचार रखे। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से मुख्य अतिथि श्रीधर पराडकर को राष्ट्रपति के द्वारा पुरस्कार दिए जाने पर परिषद ने उन्हें सम्मानित करते हुए बधाई भी दी। इस मौके पर कई प्रांतों से साहित्यकार मौजूद रहे।
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इस अवसर पर श्रीधर पाड़कर ने कहा कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी को आयोजन करने का मूल उद्देश्य भारतीय संस्कृति में पर्यावरण के महत्व के बारे में अवगत करवाना है। पर्यावरण वैदिक काल से ही भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग रही है और वर्तमान व भविष्य में भी इसे बनाए रखना अति आवश्यक है। अखिल भारतीय परिषद विश्व की साहित्य परिषद है। जिसकी राष्ट्र के भीतर 460 इकाइयों में चल रही है। साहित्य समाज का आइना है। साहित्यकार में उसके इर्द-गिर्द का परिवेश उसकी लेखनी में झलकता है। वर्तमान में भारतीय साहित्य में पर्यावरण के प्रति हर लेखक सजग है। विश्व पर्यावरण का बचाने के लिए हमारे आदि काल से लेकर अब तक लेख लिखें जा रहे है। उन्होंने प्रकृति को बचाने के लिए संतुलन पर जोर दिया। इस मौके पर राष्ट्रीय महामंत्री ऋषि कुमार, हरियाणा साहित्य अकादमी के अश्वनी कुमार, प्रदेश की प्रांतीय अध्यक्ष रीता सिंह ने भी अपने विचार रखे। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से मुख्य अतिथि श्रीधर पराडकर को राष्ट्रपति के द्वारा पुरस्कार दिए जाने पर परिषद ने उन्हें सम्मानित करते हुए बधाई भी दी। इस मौके पर कई प्रांतों से साहित्यकार मौजूद रहे।
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