{"_id":"69ca7d4f1e6e3060250da338","slug":"order-for-recovery-of-rs-617-lakh-for-non-payment-of-bank-loan-kangra-news-c-95-1-kng1004-226923-2026-03-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: बैंक लोन न चुकाने पर 6.17 लाख की रिकवरी के आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: बैंक लोन न चुकाने पर 6.17 लाख की रिकवरी के आदेश
Tue, 31 Mar 2026 07:09 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 31 Mar 2026 07:09 AM IST
विज्ञापन
धर्मशाला। कांगड़ा के सिविल न्यायालय ने बैंक ऋण की अदायगी में चूक करने वाले एक डिफाल्टर के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया है। सिविल जज कोर्ट-2 कांगड़ा की न्यायाधीश सुभांगी जोशी की अदालत ने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी (केसीसी) बैंक की गगल शाखा के पक्ष में डिक्री जारी करते हुए 6,17,701 रुपये की वसूली के आदेश दिए हैं।
मामले के अनुसार एक व्यक्ति ने वर्ष 2013 में केसीसी बैंक से 3 लाख रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट ली थी, जिस पर 14.50 प्रतिशत वार्षिक ब्याज निर्धारित था। आरोप था कि उधारकर्ता ने ऋण खाते का नियमित संचालन नहीं किया और बार-बार कानूनी नोटिस देने के बावजूद भुगतान में कोताही बरती। मामले की सुनवाई के दौरान न तो उधारकर्ता और न ही उसका गारंटर अदालत में पेश हुए। इसके चलते अदालत ने उन्हें एकतरफा (एक्स-पार्टी) घोषित कर दिया।
रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि 31 अक्टूबर 2019 तक कुल बकाया राशि 6.17 लाख रुपये से अधिक हो गई है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अब प्रतिवादियों को 6,17,701 रुपये की मूल बकाया राशि पर 10.89 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 2 प्रतिशत पेनल ब्याज (कुल 12.89 फीसदी) तब तक देना होगा, जब तक पूरी रकम चुकता नहीं हो जाती। अदालत ने यह भी साफ किया कि इस भुगतान के लिए उधारकर्ता और गारंटर संयुक्त रूप से जिम्मेदार होंगे। अदालत ने मामले की डिक्री शीट तैयार करने के भी निर्देश जारी किए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मामले के अनुसार एक व्यक्ति ने वर्ष 2013 में केसीसी बैंक से 3 लाख रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट ली थी, जिस पर 14.50 प्रतिशत वार्षिक ब्याज निर्धारित था। आरोप था कि उधारकर्ता ने ऋण खाते का नियमित संचालन नहीं किया और बार-बार कानूनी नोटिस देने के बावजूद भुगतान में कोताही बरती। मामले की सुनवाई के दौरान न तो उधारकर्ता और न ही उसका गारंटर अदालत में पेश हुए। इसके चलते अदालत ने उन्हें एकतरफा (एक्स-पार्टी) घोषित कर दिया।
विज्ञापन
रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि 31 अक्टूबर 2019 तक कुल बकाया राशि 6.17 लाख रुपये से अधिक हो गई है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अब प्रतिवादियों को 6,17,701 रुपये की मूल बकाया राशि पर 10.89 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 2 प्रतिशत पेनल ब्याज (कुल 12.89 फीसदी) तब तक देना होगा, जब तक पूरी रकम चुकता नहीं हो जाती। अदालत ने यह भी साफ किया कि इस भुगतान के लिए उधारकर्ता और गारंटर संयुक्त रूप से जिम्मेदार होंगे। अदालत ने मामले की डिक्री शीट तैयार करने के भी निर्देश जारी किए हैं।
विज्ञापन