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Kangra News: तय समय के बाद भी शुरू नहीं हुआ मातृ-शिशु अस्पताल
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धर्मशाला। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार मातृ-शिशु अस्पताल तय समय सीमा बीतने के बाद भी पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है। अस्पताल प्रबंधन ने अप्रैल 2026 के अंत तक सभी सुविधाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा था। मई का पहला सप्ताह गुजरने के बावजूद भवन में केवल सीमित सेवाएं ही संचालित हो रही हैं। इससे गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के उपचार के लिए आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
गर्भवती महिलाओं को जांच, अल्ट्रासाउंड और लैब टेस्ट के लिए पुराने अस्पताल भवन तक जाना पड़ रहा है। ऐसे में महिलाओं और उनके परिजनों को एक भवन से दूसरे भवन के बीच चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। विशेषकर दूरदराज क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं को अधिक दिक्कत झेलनी पड़ रही है। कई मरीजों को मजबूरी में निजी केंद्रों में महंगे टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
जानकारी के अनुसार जीएस बाली मातृ-शिशु अस्पताल लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। अस्पताल में करीब 200 बिस्तरों की सुविधा प्रस्तावित है। अस्पताल शुरू होने से टांडा मेडिकल कॉलेज में लंबे समय से चली आ रही भीड़भाड़ की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद थी।
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वर्तमान में प्रसूति वार्ड में कई बार एक ही बिस्तर पर दो-दो महिलाओं को रखना पड़ता है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि लंबे समय से निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद सुविधाएं शुरू न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। इसका खामियाजा गर्भवती महिलाओं को झेलना पड़ रहा है।
नए भवन में रैंप का कार्य लगभग पूरा हो गया है। जल्द ही अस्पताल को पूरी तरह से शुरू कर दिया जाएगा। अस्पताल पूरी तरह से शुरू होने से गर्भवती महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा। -डॉ. मिलाप शर्मा, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, टांडा
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गर्भवती महिलाओं को जांच, अल्ट्रासाउंड और लैब टेस्ट के लिए पुराने अस्पताल भवन तक जाना पड़ रहा है। ऐसे में महिलाओं और उनके परिजनों को एक भवन से दूसरे भवन के बीच चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। विशेषकर दूरदराज क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं को अधिक दिक्कत झेलनी पड़ रही है। कई मरीजों को मजबूरी में निजी केंद्रों में महंगे टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
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जानकारी के अनुसार जीएस बाली मातृ-शिशु अस्पताल लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। अस्पताल में करीब 200 बिस्तरों की सुविधा प्रस्तावित है। अस्पताल शुरू होने से टांडा मेडिकल कॉलेज में लंबे समय से चली आ रही भीड़भाड़ की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद थी।
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वर्तमान में प्रसूति वार्ड में कई बार एक ही बिस्तर पर दो-दो महिलाओं को रखना पड़ता है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि लंबे समय से निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद सुविधाएं शुरू न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। इसका खामियाजा गर्भवती महिलाओं को झेलना पड़ रहा है।
नए भवन में रैंप का कार्य लगभग पूरा हो गया है। जल्द ही अस्पताल को पूरी तरह से शुरू कर दिया जाएगा। अस्पताल पूरी तरह से शुरू होने से गर्भवती महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा। -डॉ. मिलाप शर्मा, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, टांडा