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Kangra News: उपचार से पहले लैब के बाहर लाचार बीमार
Sun, 07 Sep 2025 08:35 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 07 Sep 2025 08:35 AM IST
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धर्मशाला अस्पताल स्थित क्रस्ना लैब के बाहर लगी मरीजों की भीड़। -संवाद
धर्मशाला। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला स्थित क्रस्ना लैब के बाहर रोजाना मरीजों को लंबी कतारों में इलाज से पहले कड़ा इम्तहान देना पड़ रहा है। कर्मचारियों की कमी के कारण मरीजों और तीमारदारों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इससे हालात ऐसे हो बन रहे हैं कि उपचार से पहले ही लोग थककर लाचार नजर आते हैं।
लैब में पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग काउंटर तो बनाए गए हैं, लेकिन बिलिंग का काम केवल एक ही कर्मचारी देख रहा है। इससे दो लाइनें होने के बावजूद मरीजों को एक ही काउंटर पर घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। हालात ऐसे हैं कि कभी महिलाओं और पुरुषों के बीच तनातनी हो जाती है तो कभी लाइन से बाहर निकलने वाले मरीज अपनी जगह दोबारा नहीं पा पाते।
सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ रही है। लंबे समय तक खड़े रहना उनके लिए संभव नहीं होता, लेकिन मजबूरी में उन्हें भी लाइन में धक्कामुक्की झेलनी पड़ रही है। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि जब दो काउंटर बने हुए हैं तो दोनों पर कर्मचारी तैनात होने चाहिए।
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अस्पताल की सरकारी लैब सुबह 11 बजे तक ही सैंपल लेती है। इसके बाद पूरे दिन मरीजों को क्रस्ना लैब का ही सहारा लेना पड़ता है। यहां कई टेस्ट निशुल्क जरूर हैं, लेकिन अपनी बारी के इंतजार में मरीज बेहाल हो जाते हैं। मनीषा, प्रिया, विशाल, अनिकेत, सौरभ और रमेश सहित कई लोगों ने कहा कि केवल एक कर्मचारी के कारण हर दिन लंबी कतारों में लगना पड़ता है। ऐसे में बीमार मरीजों और उनके परिजनों को भारी दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
धर्मशाला अस्पताल स्थित क्रस्ना लैब निजी संस्था है। मगर फिर भी उन्हें कहा जाएगा कि दोनों बिलिंग काउंटर पर कर्मचारी तैनात किए जाएं, ताकि मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना न करना पड़े। -डॉ. सुनील भट्ट, एसएमओ, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला
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लैब में पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग काउंटर तो बनाए गए हैं, लेकिन बिलिंग का काम केवल एक ही कर्मचारी देख रहा है। इससे दो लाइनें होने के बावजूद मरीजों को एक ही काउंटर पर घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। हालात ऐसे हैं कि कभी महिलाओं और पुरुषों के बीच तनातनी हो जाती है तो कभी लाइन से बाहर निकलने वाले मरीज अपनी जगह दोबारा नहीं पा पाते।
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सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ रही है। लंबे समय तक खड़े रहना उनके लिए संभव नहीं होता, लेकिन मजबूरी में उन्हें भी लाइन में धक्कामुक्की झेलनी पड़ रही है। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि जब दो काउंटर बने हुए हैं तो दोनों पर कर्मचारी तैनात होने चाहिए।
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अस्पताल की सरकारी लैब सुबह 11 बजे तक ही सैंपल लेती है। इसके बाद पूरे दिन मरीजों को क्रस्ना लैब का ही सहारा लेना पड़ता है। यहां कई टेस्ट निशुल्क जरूर हैं, लेकिन अपनी बारी के इंतजार में मरीज बेहाल हो जाते हैं। मनीषा, प्रिया, विशाल, अनिकेत, सौरभ और रमेश सहित कई लोगों ने कहा कि केवल एक कर्मचारी के कारण हर दिन लंबी कतारों में लगना पड़ता है। ऐसे में बीमार मरीजों और उनके परिजनों को भारी दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
धर्मशाला अस्पताल स्थित क्रस्ना लैब निजी संस्था है। मगर फिर भी उन्हें कहा जाएगा कि दोनों बिलिंग काउंटर पर कर्मचारी तैनात किए जाएं, ताकि मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना न करना पड़े। -डॉ. सुनील भट्ट, एसएमओ, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला