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Kangra News: कार की डैशबोर्ड से मिला था चिट्टा, भोरंज निवासी दोषी को दो साल की कैद

Fri, 29 May 2026 12:30 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2026 12:30 AM IST
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Chitta was found on the dashboard of the car, Bhoranj resident convicted and sentenced to two years imprisonment
बिलासपुर। विशेष न्यायाधीश घुमारवीं डॉ. मोहित बंसल की अदालत ने चिट्टा तस्करी के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी हमीरपुर जिले के भोरंज क्षेत्र के निवासी सूरज शर्मा को एनडीपीएस एक्ट की धारा 21(बी) के तहत दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को दो वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, मामले में सह आरोपी संजय कुमार को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 29 के तहत दोनों को आरोपों से मुक्त कर दिया।
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अभियोजन के अनुसार 27 सितंबर 2020 को पुलिस थाना तलाई के एएसआई पृथी चंद और अन्य पुलिस कर्मी मरूड़ा क्षेत्र में नाकाबंदी और ट्रैफिक चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान बड़सर की ओर से आई एक कार को जांच के लिए रोका गया। कार चालक ने जब वाहन के दस्तावेज निकालने के लिए डैशबोर्ड खोला तो पुलिस को उसकी हरकत संदिग्ध लगी। तलाशी लेने पर डैशबोर्ड से एक पॉलिथीन पैकेट बरामद हुआ, जिसमें सफेद-भूरे रंग का पदार्थ पाया गया। जांच में यह पदार्थ हेरोइन निकला। मौके पर उसका वजन 6.27 ग्राम पाया गया। पुलिस ने नियमानुसार सीलिंग, एनसीबी फार्म और जब्ती की कार्रवाई पूरी करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। बाद में एसएफएसएल जुन्गा की रिपोर्ट में बरामद पदार्थ को डायएसिटाइल मॉर्फीन (हेरोइन/चिट्टा) पाया गया। सुनवाई के दौरान स्वतंत्र गवाह अमित कुमार अपने पहले बयान से मुकर गया, लेकिन अदालत ने कहा कि केवल गवाह के हॉस्टाइल होने से पूरा मामला कमजोर नहीं हो जाता। अदालत ने माना कि गवाह ने जब्ती मेमो और अन्य दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षर स्वीकार किए हैं। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस अधिकारियों की गवाही विश्वसनीय और भरोसेमंद है, बरामदगी और जांच प्रक्रिया में कोई ऐसी कमी नहीं मिली, जिससे आरोपी सूरज शर्मा को संदेह का लाभ दिया जा सके। मामले में पुलिस ने दावा किया था कि आरोपी सूरज शर्मा ने हेरोइन सह आरोपी संजय कुमार उर्फ बौंटा से खरीदी थी। हालांकि अदालत ने पाया कि पुलिस संजय कुमार और सूरज शर्मा के बीच किसी तरह की कॉल डिटेल, बैंक लेनदेन या अन्य ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। संजय कुमार के घर से कुछ सामान बरामद जरूर किया गया, लेकिन उनमें कोई नशीला पदार्थ नहीं मिला। इसी आधार पर अदालत ने कहा कि दोनों आरोपियों के बीच आपराधिक साजिश साबित नहीं हो पाई। सजा सुनाते समय अदालत ने कहा कि प्रदेश में नशे के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और ऐसे अपराध समाज, युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त संदेश देना जरूरी है, हालांकि आरोपी के प्रथम अपराधी होने को भी ध्यान में रखा गया।
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