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Kangra News: बिगड़ी हुई टीबी की बीमारी के लिए बीपीएएलएम पद्धति प्रभावी उपचार
Wed, 02 Apr 2025 01:07 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 02 Apr 2025 01:07 AM IST
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बिगड़ी हुई टीबी की बीमारी के लिए बीपीएएलएम पद्धति प्रभावी उपचार
धर्मशाला। सीएमओ कांगड़ा डॉ. राजेश गुलेरी ने बताया कि बिगड़ी हुई टीबी की बीमारी के लिए बीपीएएलएम पद्धति को बेहद प्रभावी उपचार विकल्प माना है। बीपीएएलएम पद्धति में चार दवाएं प्रेटोमैनिड, बेडेक्विलिन, लिनजोलिड और मॉक्सीफ्लॉक्सेसिन शामिल हैं। यह पुरानी एमडीआर-टीबी उपचार विधि की तुलना में सुरक्षित, अधिक प्रभावी और त्वरित उपचार विकल्प साबित हुआ है। 29 मार्च को जिला कांगड़ा के दो मरीजों को बिगड़ी टीबी के नए इलाज की पद्धति बीपीएएलएम पद्धति पर डाला गया। इससे पहले ऐसे मरीजों के इलाज का समय 18 से 20 महीने या फिर 9 से 11 महीने तक था और साथ में अधिक दवा का सेवन करना पड़ता था। मगर अब इस नई पद्धति में मरीज का सिर्फ 26 से 39 सप्ताह तक ही कम दवाइयों के साथ ही पूरा कोर्स होगा। ड्रग रेजिस्टेंस टीबी सेंटर मेडिकल कॉलेज टांडा के नोडल ऑफिसर डॉ. दविंद्र सिंह डडवाल ने इस पद्धति से जिला कांगड़ा के दो मरीजों के इलाज की शुरुआत मेडिकल कॉलेज टांडा से की। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने बताया कि इलाज की यह नई पद्धति बिगड़ी हुई टीबी के इलाज में एक मील का पत्थर साबित होगी और बिगड़ी हुई टीबी के रोगियों को लंबे इलाज की अवधि से बड़ी राहत मिलेगी।
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धर्मशाला। सीएमओ कांगड़ा डॉ. राजेश गुलेरी ने बताया कि बिगड़ी हुई टीबी की बीमारी के लिए बीपीएएलएम पद्धति को बेहद प्रभावी उपचार विकल्प माना है। बीपीएएलएम पद्धति में चार दवाएं प्रेटोमैनिड, बेडेक्विलिन, लिनजोलिड और मॉक्सीफ्लॉक्सेसिन शामिल हैं। यह पुरानी एमडीआर-टीबी उपचार विधि की तुलना में सुरक्षित, अधिक प्रभावी और त्वरित उपचार विकल्प साबित हुआ है। 29 मार्च को जिला कांगड़ा के दो मरीजों को बिगड़ी टीबी के नए इलाज की पद्धति बीपीएएलएम पद्धति पर डाला गया। इससे पहले ऐसे मरीजों के इलाज का समय 18 से 20 महीने या फिर 9 से 11 महीने तक था और साथ में अधिक दवा का सेवन करना पड़ता था। मगर अब इस नई पद्धति में मरीज का सिर्फ 26 से 39 सप्ताह तक ही कम दवाइयों के साथ ही पूरा कोर्स होगा। ड्रग रेजिस्टेंस टीबी सेंटर मेडिकल कॉलेज टांडा के नोडल ऑफिसर डॉ. दविंद्र सिंह डडवाल ने इस पद्धति से जिला कांगड़ा के दो मरीजों के इलाज की शुरुआत मेडिकल कॉलेज टांडा से की। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने बताया कि इलाज की यह नई पद्धति बिगड़ी हुई टीबी के इलाज में एक मील का पत्थर साबित होगी और बिगड़ी हुई टीबी के रोगियों को लंबे इलाज की अवधि से बड़ी राहत मिलेगी।