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11 मई तक रिमांड पर भेजे नाबालिग छात्रा के दुराचार के आरोपी
Updated Mon, 07 May 2018 11:16 PM IST
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पालमपुर (कांगड़ा)। उपमंडल पालमपुर की नाबालिग छात्रा के साथ दुराचार मामले में फरार तीन आरोपियों को पुुलिस पालमपुर ले आई है। जबकि दो नाबालिग आरोपी पहले ही पकड़े जा चुके हैं। गोरखपुुर (यूपी) से गिरफ्तार तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय से 11 मई तक पुलिस रिमांड मिला है।
हालांकि पकड़े गए आरोपियों को लेकर पुलिस अभी कुछ भी कहने से बच रही है। लेकिन सूत्रों की मानें तो एक हफ्ते से फरार यह तीनों आरोपी नेपाल भागने की फिराक में थे। लेकिन, पैसे की कमी होने के कारण यह आरोपी नेपाल तक नहीं जा सके थे। जबकि इन आरोपियों के पास अपने मोबाइल भी नहीं थे। यह आरोपी पहले कपूरथला, दिल्ली और उसके बाद गोरखपुर पहुंचे। जबकि दुराचार करने के बाद तीन आरोपियों के साथ एक नाबालिग आरोपी भी भाग गया था। लेकिन, यह तीनों को छोड़ कर जालंधर से वापस आ गया था। इसके बाद यह तीनों फरार हो गए थे। वहीं पुख्ता सूत्रों की मानें तो इनको पनाह देने और आर्थिक मदद करने वाले गिरफ्तार अश्वनी से ही पुलिस को अहम सुराग मिले थे। इस पर पुलिस ने एक एसआईटी और एक अन्य पुलिस की टीम गठित की थी। एसआईटी टीम के प्रभारी डीएसपी पालमपुर विकास धीमान थे। उधर, डीएसपी पालमपुर विकास धीमान ने 11 मई तक पुलिस रिमांड की पुष्टि की है।
नंबर से भी मिली जानकारी
दुराचार के फरार आरोपियों के पास मोबाइल नहीं थे। लेकिन, वह गांव के किसी व्यक्ति के संपर्क में थे। इसकी भनक पुलिस को लग गई। इसमें एसएचओ पालमपुर भूपेंद्र ठाकुर की भूमिका भी अहम रही है। जो मोबाइल की तकनीक में माहिर हैं। इसका पता चलते ही पुलिस इन आरोपियों तक पहुंच गई। जिस पर पुलिस ने इनको यूपी पुलिस की मदद से गोरखपुर से गिरफ्तार कर लिया। दुराचार के मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने मामले को कैसे अंजाम दिया। इसका पता पुलिस आरोपियों से पूछताछ में करेगी।
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हालांकि पकड़े गए आरोपियों को लेकर पुलिस अभी कुछ भी कहने से बच रही है। लेकिन सूत्रों की मानें तो एक हफ्ते से फरार यह तीनों आरोपी नेपाल भागने की फिराक में थे। लेकिन, पैसे की कमी होने के कारण यह आरोपी नेपाल तक नहीं जा सके थे। जबकि इन आरोपियों के पास अपने मोबाइल भी नहीं थे। यह आरोपी पहले कपूरथला, दिल्ली और उसके बाद गोरखपुर पहुंचे। जबकि दुराचार करने के बाद तीन आरोपियों के साथ एक नाबालिग आरोपी भी भाग गया था। लेकिन, यह तीनों को छोड़ कर जालंधर से वापस आ गया था। इसके बाद यह तीनों फरार हो गए थे। वहीं पुख्ता सूत्रों की मानें तो इनको पनाह देने और आर्थिक मदद करने वाले गिरफ्तार अश्वनी से ही पुलिस को अहम सुराग मिले थे। इस पर पुलिस ने एक एसआईटी और एक अन्य पुलिस की टीम गठित की थी। एसआईटी टीम के प्रभारी डीएसपी पालमपुर विकास धीमान थे। उधर, डीएसपी पालमपुर विकास धीमान ने 11 मई तक पुलिस रिमांड की पुष्टि की है।
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नंबर से भी मिली जानकारी
दुराचार के फरार आरोपियों के पास मोबाइल नहीं थे। लेकिन, वह गांव के किसी व्यक्ति के संपर्क में थे। इसकी भनक पुलिस को लग गई। इसमें एसएचओ पालमपुर भूपेंद्र ठाकुर की भूमिका भी अहम रही है। जो मोबाइल की तकनीक में माहिर हैं। इसका पता चलते ही पुलिस इन आरोपियों तक पहुंच गई। जिस पर पुलिस ने इनको यूपी पुलिस की मदद से गोरखपुर से गिरफ्तार कर लिया। दुराचार के मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने मामले को कैसे अंजाम दिया। इसका पता पुलिस आरोपियों से पूछताछ में करेगी।
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