हिमाचल: कसौली में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट का आगाज, तीन दिन में 27 सत्रों में होगी चर्चा
लिटफेस्ट की शुरुआत में खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह और पत्रकार एवं स्तंभकार बच्ची करकरिया ने खुशवंत सिंह पर विचार रखे। तीन दिन तक 45 से ज्यादा नामचीन हस्तियां शिरकत करेंगी।
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सुरीली धुनों, भक्तिज्ञान की प्रस्तुति और प्रसिद्ध लेखक, पत्रकार और उपन्यासकार खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह के संबोधन के साथ 15वां तीन दिवसीय खुशवंत सिंह लिटफेस्ट कसौली में शुरू हो गया। देश के महान लेखकों में शुमार खुशवंत सिंह की याद में इस बार का थीम ‘द आर्ट ऑफ डिसएग्रीमेंट : कन्वर्सेशन एक्रॉस डिवाइड्स’ रखा गया है। इसमें देश-विदेश के कई लेखक, साहित्यकार, चित्रकार, अभिनेता, अधिकारी और राजनीति से जुड़ीं हस्तियां भाग ले रही हैं। तीन दिन तक 27 सत्रों में चर्चा होगी। पहले दिन महिलाओं, समाज में बढ़ती ध्रुवीकरण की स्थिति पर वक्ताओं ने विचार रखे।
पहले दिन 11 सत्रों में 18 वक्ता शामिल हुए। लिटफेस्ट की शुरुआत में खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह और पत्रकार एवं स्तंभकार बच्ची करकरिया ने खुशवंत सिंह पर विचार रखे। तीन दिन तक 45 से ज्यादा नामचीन हस्तियां शिरकत करेंगी। आगामी दो दिनों में भी कई नामी लेखकों की किताबों पर बार चर्चा होगी। लिटफेस्ट के मुख्य वक्ताओं में मशहूर पर्यावरणविद सोनम वांगचुक, भारतीय सेना के पूर्व जनरल एमएम नरवणे, मेजर जनरल रंजन महाजन, पूर्व रॉ चीफ एएस दुलत भी शामिल हैं।
इसके अलावा फिल्मी दुनिया और कला जगत से इम्तियाज अली (फिल्म निर्देशक), दिव्या दत्ता (अभिनेत्री), संध्या मृदुल (अभिनेत्री) और पूजा बेदी, संगीत की दुनिया से सतिंदर सरताज (पंजाबी गायक), सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद डॉ. रवि चोपड़ा, लेखक, पत्रकार और विचारक जेरी पिंटो, नीलम मान सिंह चौधरी, संजय हजारिका, प्रोबल दासगुप्ता, कमला कपूर, सार्थक आहूजा, विष्णु सोम, फिरोज गुजराल और हरतोष सिंह बल शिरकत करेंगे। कार्यक्रम में फर्स्ट ग्लोबल की संस्थापक देविना मेहरा, शिक्षाविद, रंगमंच निर्देशक फैसल अल्काजी, बीबीसी की पूर्व पत्रकार गिलियन राइट, टीएमसी से पूर्व सांसद जवाहर सरकार उद्बोधन देंगे।
पहले दिन इन्होंने की चर्चा
फेस्टिवल की शुरुआत ख्वाबगाह से हुई, जिसमें साहित्यकारों और वक्ताओं ने असहमति जताने के अधिकार और समाज में बढ़ती ध्रुवीकरण की स्थिति पर अपने विचार रखे। साथ ही अधिवक्ता मीहिरा सूद ने लड़कियों के मौलिक अधिकारों से आगे के गंभीर सवालों तथा प्यार, धोखे और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दुनिया जैसे विषयों पर चर्चा की। साथ ही साहित्यकार संजय हजारिका की किताब मिजोरम: द बैटल फील्ड टू बैलट बॉक्स पर चर्चा हुई। युवा समानांतर सत्र (फॉर एवर यंग) एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें 15 से 18 वर्ष की आयु के छात्रों और उभरते लेखकों की प्रतिभा को मंच देने के लिए विशेष समानांतर कार्यशालाएं और सत्र चलाए गए।